जन्माष्टमी व्रत कथा: योगमाया ने कंस से कहा-तुझे मारने वाला तो पैदा हो गया, पढ़ें श्रीकृष्णजन्माष्टमी व्रत कथा

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

कंस ने एक -एक करके देवकी की सात संतान मार दी, लेकिन आठवीं बार कान्हा जी पैदा हुए इस पर योगमाया ने भविष्यवाणी की पढ़ें जन्माष्टमी की संपूर्ण कथा

Janmashtami Vrat katha
Janmashtami Vrat katha

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। आपको बता दें कि मथुरा में कारागार में देवकी के गर्भ से कान्हा जी ने जन्म लिया और मां यशोदा ने उनको पाला। इस व्रत की कथी इस प्रकार है। द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करते थे। उनके पुत्र कंस ने उन्हें गद्दी से उतार दिया और स्वयं राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी से हुआ था। शादी के बाद जब कंस अपनी बहन को ससुराल ले जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि तू आज जिससे बड़ा प्रेम कर रहा है नो तेरे काल का ग्रास बनेगा। देवकी के गर्भ से उत्पन्न हुआ आठवां पुत्र ही तुम्हें मारेगा। यह सुनकर कंस को बहुत गुस्सा आया। वो वासुदेव को मारने लगा, लेकिन देवकी ने कहा कि मैं तुम्हें अपनी हर संतान खुद लाकर दूंगी। कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा में उन्हें कारागृह में डाल दिया।

वसुदेव-देवकी के इस तरह सात बच्चे हुए और देवकी ने सभी बच्चों को कंस को दे दिया और कंस ने उन्हें मार दिया। इसके बाद जब देवकी का आठवां गर्भ प्रकट हुआ जो वायुसे भरा हुआ था। कंसने देखा, देवकी के मुख और नेत्र इस बार खिल उठे हैं।

कंस ने कहा कि इस गर्भसे जो संतान होगी, वही मेरी मृत्युका कारण है'-ऐसा कहकर कंस ने पहरा बढ़वा दिया। जब प्रसवकाल आया तो इसी समय जब रात के दो पहर बीत गये, आकाशमें बादल घिर आए, बिजलियां चमकने लगीं, वायु चलने लगी तथा रक्षक निश्चैष्ट सो गये, मानो मरकर अचेत हो गये हों; तब धर्म, ब्रह्मा तथा शिव आदि देवेश्वरगण वहां आए और गर्भस्थ परमेश्वरकी स्तुति करने लगे।जब रातके सात मुहूर्त निकल गये और आठवां उपस्थित हुआ, तब आधी रातके समय सर्वोत्कृष्ट शुभ लग्र आया। वह वेदोंसे अतिरिक्त तथा दूसरोंके लिये दुर्शेय लग्न था। उस लग्नपर केवल शुभ ग्रहोंकी दृष्टि थी। अशुभ ग्रहोंकी नहीं थी। रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथिके संयोगसे जयन्ती नामक योग सम्पन्न हो गया था। जब अर्धचन्द्रमाका उदय हुआ, उस समय लग्र की ओर देख-देखकर भयभीत हुए सूर्य आदि सभी ग्रह आकाशमें अपनी गति के क्रमको लांघकर मीन लग्र में जा पहुंचे । ऋषि, मनु, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, देवता और देवियां सभी प्रसन्न थे। अप्सराए नृत्य करने लगीं। इसके बाद वासुदेव और देवकी के जिस समय पुत्र हुआ यशोदा के यहां कन्या ने जन्म लिया। वासुदेव अपने पुत्र को सूप में रखकर नदियां पार करते हुए यशोदा के यहां छोड़ आए और उन्होंने उस महामायास्वरूपिणी बालिका को सुला दिया। बालिका जोर-जोरसे रोने लगी। उसे देखकर देवकी थर्रा उठी।

उस बालिका ने अपने रोनेकी आवाज से ही रक्षकों को जगा दिया। रक्षक शीघ्र उठकर खड़े हो गये और उस बालिका को छीनकर कंस के निकट जा पहुंचे। देवकी और वसुदेव भी शोकसे विह्ल हो पीछे-पीछे गये। महामुने! बालिकाको देखकर कंसको अधिक प्रसन्नता नहीं हुई। उस रोती हुई बच्चीपर भी उसे दया नहीं आयी। वह क्रूरकर्मा असुर उस बालिकाको लेकर पत्थरपर दे मारनेके लिये आगे बढ़ा। उस समय वसुदेव और देवकी ने बड़े परंतु वह कन्या योगमाया थी और आकाश में उड़ गई और वहां से कहा कि अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में आ गया है। यह है कृष्ण जन्म की कथा।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़Krishna Janmkatha:योगमाया ने कंस से कहा-तुझे मारने वाला तो पैदा हो गया