जन्माष्टमी व्रत करने और रात को जन्मोत्सव मनाकर सुबह व्रत खोलने पर क्या फल मिलता है?

लाइव हिन्दुस्तान
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ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका जिक्र किया गया है कि जो जन्माष्टमी का व्रत करता है और रात को कान्हा जी का जन्मोत्सव मनाकर सुबह व्रत खोलता है। उसे क्या फल मिलता है। 

janmashtami ka fal
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ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार अगर जन्माष्टमी की आधी रात के समय अष्टमी तिथि का एक चौथाई अंश भी मिल रहा हो तो उस समय व्रत करना चाहिए। इस साल यही हो रहा है। जन्म से पहले अष्टमी तिथि खत्म हो जाएगी, व्रत 4 सितंबर को ही किया जाएगा। पुराणों में कहा गया है कि ऐसे ही समय में साक्षात्‌ श्रीहरि ने अवतार ग्रहण किया था, यह तिथि बहुत पुण्य देने वाली है, इसलिए इसे जयंती कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि जो अष्टमी को उपवास करता है और रात्रि में कान्हा का जन्म कराता है, वो करोड़ों जन्मों में पापोंसे छुटकारा पा जाता है। इसमें संशय नहीं है।

जन्माष्टमी व्रत और पारण का क्या फल मिलता है

कहा जाता है कि जो इस विधि से व्रत को करता है वो अपनी करोड़ों पीढ़ियों का उद्धार कर देता है। जो सम्पत्ति से रहित भक्त मनुष्य हैं, वे बिना की सामग्री के सिर्फ उपवासमात्र कर लें तो भगवान्‌ माधव उनपर प्रसन्न हो जाते हैं। कहा जाता है कि तिथिको जागरणपूर्वक ब्रत का अनुष्ठान करके श्रीहरि जयन्ती व्रत का भी फल दे देते हैं। जो मनुष्य सौ जन्मों के किए पापों से छुटकारा पाना चाहता है वो अष्टमी-ब्रत के उत्सव में धन का उपयोग करने में जाता है। इसमें संशय नहीं है। जो मनुष्य शुद्धा कंजूसी नहीं करता, उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है। यह भी कहा जाता है कि जो जन्माष्टमी का व्रत विधान से करता है वो अश्वमेध-यज्ञ का. फलका भागी होता है। और इस बात का ध्यान रखें कि रोहिणी में पारणा न करे, अगर आप ऐसा करते हैं तो श्रीकृष्णजन्माष्टमी के दिन भोजन करने वाले को घोर पापों और उनके भयानक फलों के भागी होते हैं। जो उपवास करने में असमर्थ हो, ब्राह्मण को भोजन करावे अथवा उतना धन दे दें।

कब व्रत करना चाहिए और पारण कब करना चाहिए?

सप्तमीविद्धा अष्टमी का व्रत नहीं करना चाहिए । रोहिणी नक्षत्र का योग मिलने पर भी सप्तमी विद्धा अष्टमी काव्रत नहीं करना चाहिए, यह शास्त्र के खिलाफ है, आप नवमीविद्धा अष्टमी का व्रत कर सकते हैं। भगवान्‌ देवकीनन्दन अविद्ध-तिथि एवं नक्षत्र में अवतीर्ण हुए थे। इसके अलावा जहां तक व्रत के पारण की बात है तो रोहिणी नक्षत्र बीत जाने पर ही ब्रती को पारणा करना चाहियए। तिथि के अन्त में श्रीहरि का स्मरण तथा देवताओं का पूजन करके की हुई पारणा पवित्र मानी गया है।

यह भी कहा गया है कि पारणा न करने पर फल में कमी आती है। रोहिणी ब्रत के सिवा दूसरे किसी ब्रत में रात को पारणा नहीं करनी चाहिए। महारात्रि को छोड़कर दूसरी रात्रिमें पारणा की जा सकती है। ब्राह्मणों और देवताओंकी पूजा करके पूर्वाह्कालमें पारणा उत्तम मानी गयी है। रोहिणी-ब्रत सबको सम्मत है। उसका अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए। यदि बुध अथवा सोमवारसे युक्त जयन्ती मिल जाय तो उसमें ब्रत करने वाला मोक्ष पाता है। जिस समय सम्पूर्ण दिन-रात में नवमी हो तथा बुध, सोम एवं रोहिणी नक्षत्रका योग प्राप्त हो तो वह सबसे उत्तम ब्रत का समय है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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