Janmashtami Muhurat: जहां जन्माष्टमी व्रत रखा जाता है वहां नहीं होती अकालमृत्यु, पढ़ें 4 या 5 कब व्रत, क्या मुहूर्त
Krishna Janmashtami kab hai: जन्माष्टमी भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को 4 सितंबर को मनाई जा रही है। कुछ लोग 5 सितंबर को भी मनाएंगे, कंफ्यूजन है तो यहां पढ़ें

कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व फलदायक रहेगा। आपको बता दें कि नवमी युक्त जन्माष्टमी का पर्व बहुत खास माना जा रहा है। वैसे तो इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को किया जा रहा है, लेकिन कईलोग 5 सितंबर को भी पर्व मना रहे हैं। दरअसल 4 सितंबर को जन्माष्टमी पर्व उत्तम है, क्योंकि इस दिन अष्टमी तिथि मिल रही है। लेकिन व्रत का पारण नवमी तिथि में होगा, क्योंकि कुछ देर बाद नवमी तिथि लग जाएगा। इसे बहुत अच्छा कहा जाता है। कहा जा रहा है कि ग्रहस्थजन इसे 4 सितंबर को और वैष्णव जन इसे 5 सितंबर को करेंगे। ब्रह्मवैवर्त पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, यदि शुद्धा अष्टमी का अभाव हो, तो अष्टमी से युक्त नवमी को पूजा और व्रत के लिए कर लिया जाता है। आपको बता दें कि श्रीकृष्ण की पूजा के लिए निशिथकाल का समय खास होता है। इस बार जन्माष्टमी पर बहुत ही सुंदर संयोग बन रहा है। इसे महायोग कह सकते हैं, क्योंकि द्वापर युग में तीन में दो बातें इस साल पूरी हो रही हैं।
कब हुआ था कान्हा का जन्म
द्वापर युग में कान्हा का जन्म तब हुआ था , जब वृष राशि में चंद्रमा थे, भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि है, इसके अलावा बुधवार का दिन था और रोहिणी नक्षत्र था। दरअसल इनमें से दो चीजें इस साल पूरी हो रही है। सिर्फ दिन बुधवार का नहीं है। दिन शुक्रवार का है, बाकी सभी संयोग द्वापर युग वाले बन रहे हैं। इस प्रकार इस साल की जन्माष्टमी बहुत ही उत्तम रहेगी। इस दौरान उत्तम फलों की प्राप्ति होगी।
जन्माष्टमी में क्या भोग लगाएं और क्या अर्पित करें
जन्माष्टमी पर पूजा में श्रीफल रखें, सभी फल, इनमें खीरा हो। इसके अलावा जापे में खाने वाला मेवापाक भी शगुन के लिए बनता है। वहीं आप छप्पन भोग का भी कान्हा जी को भोग लगा सकते हैं। इसके साथ माखन मि्श्री को जरूर रखें। पूजा के पंजीरी और चरणामृत भी बनाएं। इससे भी मुख्य पूजा की जाती है।
पहले चरणामृत से रात 12 बजे कान्हा का अभिषेक कर इसे चरणामृत समझ पूरा परिवार ग्रहण करें। इसके बाद पंजीरी और माखन मिश्री का भोग लगाएं। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी उत्तम माना जाता है। आपको इस व्रत का फल नहीं पता, इस व्रत का फल कई एकादशियों के फल के समान माना गया है।
कब मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व और क्या है पर्व का महत्व
4 सितंबर की रात 2:26 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 5 सितंबर की रात 12:14 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए 45 मिनट का खास समय मिल रहा है, जब कान्हा जी की पूजा कर सकते हैं। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों और घरों में अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं। पुराणों में लिखा है कि जहां जहां यह उत्सव किया जाता है, वहां जन्म-मरण का फेर नहीं रहता है। वहां सूखा भी नहीं पड़ता है, समयपर वर्षा होती है। जिस घर में यह देवकी-व्रत किया जाता है, वहां अकालमृत्यु नहीं होती ओर न गर्भपात होता है । जो एक बार भी इस त्रतको करता है, वह विष्णुलोक को प्राप्त होता है।


