जन्माष्टमी कब है 2026: कब है जन्माष्टमी, पूजा के लिए 40 मिनट का मुहूर्त, रोहिणी नक्षत्र में क्यों मनती है जन्माष्टमी
जन्माष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त: जन्माष्टमी कब है और इस दिन क्या ग्रह नक्षत्रों के योग बन रहे हैं। यहां जानें पूजा का शुभ मुहूर्त कितने बजे से कितने बजे तक रहेगा।

भादो मास की अष्टमी तिथि में के दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार तिथि को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है। आको बता दें कि अष्टमी तिथि का आरंभ तीन सितंबर को देर रात 1:33 बजे से लग गई है और चार सितंबर को रात 12:13 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि में अष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। देश के कई बड़े मंदिरों में इसी दिन पूजा की जा रही है। इस साल पूजा का मुहूर्त :रात्रि 11:26 बजे से रात्रि 12:11 बजे तक रहेगा, इस तरह आपको पूजा के लिए 46 मिनट का समय मिलेगा।
इस साल कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
उत्थान ज्योतिष एवं आध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली की मानें तो इस साल जन्माष्टमी जयंती योग में मन रही है। आपको बता दें कि जन्माष्टमी का शुभ संयोग तब बनता है जब भादो मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि हो, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि व मध्यरात्रि में वृष लग्न का शुभ संयोग होता है। इस बार ये सभी चीजें मिल रही हैं। इसलिए जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
क्यों रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा की पूजा होती है?
आपको बता दें कि रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र, यह उनकी पत्नी भी है। इसलिए रोहिणी नक्षत्र को चुना। चंद्रदेव ने भगवान से इच्छा जाहिर की थी कि जब उनके वंश में जब नारायण अवतार लें तो वह उनका दर्शन कर सकें। इस अभिलाषा को पूर्ण करने के लिए नारायण ने रात्रि बेला में कृष्ण के रूप में अवतार लिया। श्रीमद्भागवत व अन्य धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि अर्धरात्रि में जिस समय पृथ्वी पर कृष्ण अवतार हुआ, उसी समय आकाश में चंद्रदेव प्रकट हुए और दर्शन किया। हालांकि उस समय घटायें छायी हुईं थीं।
जन्माष्टमी पर कैसी है ग्रहों की स्थिति
जन्माष्टमी पर देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में रहेंगे। ग्रहों में राजा सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह में विद्यमान रहकर शुभ परिणाम प्रदान करेंगे। सौभाग्य, कला, सौंदर्य व प्रेम का कारक ग्रह शुक्र अपनी राशि तुला में विद्यमान रहकर इस दिन की महत्ता को बढ़ाने वाले होंगे। इस दिन जयंती योग भी है और इसमें की गई पूजा और ध्यान अक्षय गुना फल प्रदान करता है। कान्हा के जन्म पर रात में उन्हें स्नान कराकर माखन मि्श्री का भोग लगाना चाहिए, शंख बजाना चाहिए और लड्डू-गोपाल के शृंगार में मोरपंख, बांसुरी, वैजयंती के फूलों या बीजों से बनी माला, चांदी की पायल को भी अर्पित करना चाहिए, जो इस दिन व्रत रखते हैं वो पारण 5 सितंबर को सुबह 6 बजे करेंगे।


