असल में क्या हैं होते हैं इच्छाशक्ति के सही मायने? सफलता के लिए ये कितना है जरूरी?
दुर्बल इच्छाशक्ति एक ऐसी सीमित इच्छाशक्ति है। जैसे ही कठिनाइयां और असफलताएं उसे नष्ट करने की कोशिश करती हैं तो अनंत शक्ति के स्रोत से उसका संबंध एकदम से टूट जाता है। ये समझना जरूरी है कि अच्छे उद्देश्य के लिए इच्छाशक्ति के पीछे ईश्वर की इच्छाशक्ति होती है, जो कभी विफल हो ही नहीं सकती।

दुर्बल इच्छाशक्ति एक सीमित इच्छाशक्ति है। जैसे ही कठिनाइयां और असफलताएं उसे नष्ट कर देती हैं, अनंत शक्ति के स्रोत से उसका संबंध टूट जाता है। अच्छे उद्देश्य के लिए इच्छाशक्ति के पीछे ईश्वर की इच्छाशक्ति होती है, जो कभी विफल नहीं हो सकती। यहां तक कि ईश्वर की इच्छाशक्ति को रोकने की शक्ति मृत्यु में भी नहीं है। जिस प्रार्थना के पीछे अनवरत इच्छाशक्ति हो, उस प्रार्थना का उत्तर प्रभु अवश्य देंगे।
अधिकांश लोग जब कुछ ऐसा पाने की कोशिश कर रहे होते हैं, जिसका उनके लिए बहुत महत्व है, तो वे अत्यधिक अशांत या तनावग्रस्त हो जाते हैं। अधीर और अशांत कार्य ईश्वर की शक्ति को आकर्षित नहीं करते, परंतु इच्छाशक्ति का निरंतर शांत, शक्तिपूर्ण प्रयोग सृष्टि की शक्तियों को झकझोर देता है और अनंत से उत्तर प्राप्त करता है।
आप जो कुछ भी करना चाहते हैं, उसकी सफलता का बीज आपकी इच्छाशक्ति में है। कठिनाइयों से बुरी तरह आहत हुई इच्छाशक्ति थोड़े समय के लिए पंगु हो जाती है, परंतु जो कृतसंकल्प मनुष्य यह कहता है, ‘मेरा शरीर भले ही टूट जाए, परंतु इच्छाशक्ति रूपी मेरा सिर झुक नहीं सकता।’ वह इच्छाशक्ति की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करता है।
दिव्य बनाती इच्छाशक्ति
इच्छाशक्ति ही आपको दिव्य बनाती है। जब आप उस इच्छाशक्ति का प्रयोग करना बंद कर देते हैं, तो आप नश्वर मानव बन जाते हैं। बहुत-से लोग कहते हैं कि हमें अपनी इच्छाशक्ति का प्रयोग परिस्थितियों को बदलने के लिए नहीं करना चाहिए। हम ईश्वर की योजना में हस्तक्षेप नहीं करें। यदि हमें इच्छाशक्ति का प्रयोग न करना होता, तो ईश्वर हमें वह शक्ति देते ही क्यों? एक बार मैं ऐसे आदमी से मिला, जो कहता था कि वह इच्छाशक्ति के प्रयोग में विश्वास नहीं करता, क्योंकि उससे अहंकार बढ़ता है। मैंने कहा, ‘आप बोलने के लिए, खड़े होने के लिए या खाने के लिए, यहां तक कि सोने के लिए भी। आप जो कुछ भी करते हैं, उसमें इच्छाशक्ति का प्रयोग करते हैं।
इच्छाशक्ति के बिना आप केवल एक यंत्रवत व्यक्ति बन जाएंगे।’ जब ईसा मसीह ने कहा था, ‘प्रभु, मेरी इच्छा नहीं, केवल आपकी इच्छा पूर्ण हो’, तो उनका यह अर्थ नहीं था कि इच्छाशक्ति का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। वे यह दर्शा रहे थे कि मनुष्य को वासनाओं के अधीन रहनेवाली अपनी इच्छाशक्ति को झुकाकर ईश्वर की इच्छा के साथ जोड़ना सीखना चाहिए। जब दृढ़ता से उचित प्रार्थना की जाती है, तो वह इच्छाशक्ति है।
आप जिस परिणाम के लिए प्रार्थना कर रहे हों, उसकी संभावना में आपको पूर्ण विश्वास होना चाहिए। आपको यदि घर की आवश्यकता हो और आपका मन कह रहा हो, ‘अरे मूर्ख! घर बनाना तेरे बस की बात नहीं।’ तब फिर आपको अपनी इच्छाशक्ति को और अधिक बलवान बनाना चाहिए। जब आपके मन से ‘बस की बात नहीं’ निकल जाएगा, तब ईश्वर की शक्ति उसका स्थान ले लेगी।
आपके लिए आसमान से कोई घर गिराया नहीं जाएगा। आपको उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रचनात्मक कार्यों द्वारा इच्छाशक्ति को निरंतर प्रयुक्त करते जाना होगा। जब आप असफलताओं से हार माने बिना निरंतर प्रयास करते रहेंगे, तो आपकी इच्छित वस्तु प्राप्त हो जाएगी। जब आप लगातार अपने विचारों और कार्यकलापों में उस इच्छाशक्ति का प्रयोग करते रहते हैं, तो जिसकी आप इच्छा कर रहे हों, उसे साकार होना ही पड़ेगा।
यदि आपकी इच्छा के पूर्ण होने का कोई तरीका दुनिया में न हो, तब भी अगर आपकी इच्छाशक्ति निरंतर दृढ़ बनी रहती है, तो इच्छित परिणाम किसी-न-किसी तरह प्रकट हो ही जाएगा। इस प्रकार की इच्छाशक्ति में ही ईश्वर का उत्तर होता है, क्योंकि इच्छाशक्ति ईश्वर से ही आती है। अखंड इच्छाशक्ति दैवीय इच्छाशक्ति है।
अनंत शक्ति का स्रोत
दुर्बल इच्छाशक्ति एक सीमित इच्छाशक्ति है। जैसे ही कठिनाइयां और असफलताएं उसे नष्ट कर देती हैं, अनंत शक्ति के स्रोत से उसका संबंध टूट जाता है। मानवीय इच्छाशक्ति के पीछे ईश्वर की इच्छाशक्ति होती है, जो कभी विफल नहीं हो सकती। यहां तक कि ईश्वर की इच्छाशक्ति को रोकने की शक्ति मृत्यु में भी नहीं है। जिस प्रार्थना के पीछे अनवरत इच्छाशक्ति हो, उस प्रार्थना का उत्तर प्रभु अवश्य देंगे। अधिकांश लोग मानसिक या शारीरिक स्तर पर अथवा दोनों में आलसी होते हैं। जब उन्हें प्रार्थना करनी होती है, तब प्रार्थना के स्थान पर वे निद्रा के बारे में सोचते हैं और जैसे ही झपकी आती है, तो वे सीधे बिस्तर में घुस जाते हैं। उसी के साथ उनकी प्रार्थना का अंत हो जाता है।
संसारी व्यक्ति का दिमाग नकारात्मकता से ही भरा रहता है। कुछ विशेष गुणों और आदतों वाले परिवार में जन्म लेने के कारण वह इनसे प्रभावित होकर सोचने लगता है कि वह कुछ कार्य नहीं कर सकता, वह ज्यादा चल नहीं सकता, वह इस चीज को खा नहीं सकता, वह उसको सहन नहीं कर सकता। उन सब नकारात्मकताओं को जलाना ही होगा। आप जो कुछ भी करना चाहें, उसे कर पाने की शक्ति आपके अंदर है। वह शक्ति इच्छाशक्ति में निहित है।
संगति का प्रभाव
जो कोई इच्छाशक्ति को विकसित करना चाहे, उसके लिए अच्छी संगति में रहना अनिवार्य है। आप यदि महान गणितज्ञ बनना चाहते हैं और आपके सभी संगी-साथी गणित में रुचि नहीं रखते हैं, तो आप निश्चय ही हतोत्साहित हो जाएंगे। जब आप पारंगत गणितज्ञों की संगत में रहते हैं, तो आपकी इच्छाशक्ति को उससे बल मिलता है। आप सोचते हैं- ‘यदि दूसरे लोग इसे कर सकते हैं, तो मैं भी इसे कर सकता हूं।’
अपनी इच्छाशक्ति को विकसित करने की उत्सुकता में तुरंत बड़े कार्यों को न लें। सफल होने के लिए पहले अपनी इच्छाशक्ति को किसी ऐसे छोटे कार्य में इस्तेमाल कीजिए, जिसके बारे में आप सोच रहे हों कि आप उसे नहीं कर सकते। यदि आप उस पर कठिन परिश्रम करते हैं, तो आप सफल हो सकते हैं। मुझे वे सभी लक्ष्य याद हैं, जिनके बारे में मेरे मित्र और अन्य कई लोग मुझे बताते थे कि मैं उनमें कभी सफल नहीं हो सकता; लेकिन मैं सफल हुआ। ऐसे ‘शुभचिंतक’ बहुत हानि कर सकते हैं। भगवान बचाए ऐसे लोगों से! संगति का इच्छाशक्ति पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता
वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल
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