चेतन अमल सहज सुख रासी

Feb 24, 2026 11:53 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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वस्तु, व्यक्ति और क्रिया- ये तीन चीजें दिखने में आती हैं। इनमें वस्तु तथा क्रिया- ये दोनों प्रकृति हैं और व्यक्ति रूप में जो दिखता है, यह शरीर भी प्रकृति ही है, परंतु इसके भीतर में जो न बदलने वाला है, यह परमात्मा का अंश है।

चेतन अमल सहज सुख रासी

वस्तु, व्यक्ति और क्रिया- ये तीन चीजें दिखने में आती हैं। इनमें वस्तु तथा क्रिया- ये दोनों प्रकृति हैं और व्यक्ति रूप में जो दिखता है, यह शरीर भी प्रकृति ही है, परंतु इसके भीतर में जो न बदलने वाला है, यह परमात्मा का अंश है।

अब अगर ‘यह’ वस्तु, क्रिया और व्यक्ति में नहीं उलझे, तो यह स्वाभाविक ही मुक्त है; क्योंकि ‘यह’ परमात्मा का साक्षात अंश है। इसके लिए कहा है- ‘चेतन अमल सहज सुख रासी।’ यह चेतन है, शुद्ध है, मलरहित है और सहज सुख राशि है, महान आनंद राशि है। यह महान आनंद राशि अपने स्वरूप की तरफ ध्यान न देकर संसार के संबंध से सुख चाहने लग गया। इससे यही भूल हुई है। यह संयोग जन्य सुख में फंस गया। जैसे, धन मिले, तो सुख हो। भोजन मिले, तो सुख हो। भोग मिले, तो सुख हो। कपड़ा, वस्तु, आदर, मान, सत्कार मिले, तो सुख हो।

यह बड़े आश्चर्य की बात है कि स्वयं नित्य निरंतर रहने वाला है- ‘सहज सुख रासी’ स्वाभाविक ही सुख राशि है, परंतु इसमें यह वहम पड़ गया है कि संसार के पदार्थ मिलने से सुख होगा। यह बिछुड़ेगा जरूर ही ‘संयोगा विप्रयोगान्ताः’ जितने संयोग होते हैं, उनका अंत में वियोग होता है, तो संबंध से होने वाला सुख रहेगा कैसे? मनुष्य यह विचार नहीं करता है कि आज दिन तक संयोग से जितने सुख लिए थे, वे आज नहीं रहे। संयोग से होने वाले सुख का नमूना तो देख ही लिया; लेकिन अब भी चेत नहीं करते फिर और चाहते हैं कि संयोग से सुख ले लें।

जब तक बाहर के संयोग से संसार के संबंध से सुख लेगा, तब तक इसको वास्तविक सुख नहीं मिलेगा। ‘बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा’ बाह्य सुख (संयोग जन्य सुख) में आसक्त नहीं होगा, तो ‘विंदत्यात्मनि यत्सुखम्’ उस विलक्षण सुख को आप से आप प्राप्त हो जाएगा। संसार के सबंध से सुख लेने से इसका वास्तविक सुख गुम हो गया। वह सुख मिटा नहीं है, परंतु यह उस सुख से वियुक्त हो गया। जिनको वह सुख मिल गया, वे आनंदित हो गए। उन्हें कभी सांसारिक सुख की इच्छा ही नहीं रहती, क्योंकि उनको जो वास्तविक सुख और आनंद मिला, उसके समान कोई दूसरा सुख है नहीं।-रामसुख दास

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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