Khatu Shyam Mandir: दिन में कितनी बार होती है आरती? ये है खाटू श्याम मंदिर के खुलने और बंद होने का समय
राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर की खूब मान्यता है। इस मंदिर में होने वाली आरती से लेकर इसके खुलने-बंद होने के समय की सारी डिटेल्स यहां लें।

राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्याम मंदिर की गिनती देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में होती है। आए दिन यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। बाबा खाटू श्याम को लोग हारे का सहारा कहते हैं। मान्यता है कि खाटू श्याम अपने हारे हुए भक्तों को सहारा देते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी में परेशान होता है या किसी भी बात की निराशा होती है तो माना जाता है कि अगर खाटू श्याम बाबा के दरबार में हाजरी लगाकर अपना दुख बताया जाए तो जरूर मदद मिलती है। लोगों की आस्था है कि जब खाटू श्याम बाबा को सच्चे मन से याद किया जाए तो जिंदगी में आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है। ऐसे में इस मंदिर में लोग दूर से आकर मत्था टेकते हैं। अगर आप इस मंदिर में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो इससे जुड़ी सारी जानकारी यहां लें।
मंदिर में इतनी बार होती है आरती
खाटू श्याम मंदिर की आरती में शामिल होने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। बता दें कि यहां हर रोज कुल पांच बार आरती होती है। खाटू श्याम मंदिर में होने वाली हर आरती का समय अलग है और हर एक का महत्व अलग होता है। .हां पहुंचने वाले लोग किसी भी आरती में शामिल हो सकते हैं क्योंकि हर किसी की भव्यता अलग ही होती है और आरती के दौरान माहौल इतना भक्तिमय होता है कि कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाए।
खाटू श्याम मंदिर में आरती का समय
खाटू श्याम मंदिर में सबसे पहले मंगला आरती होती है और इसका समय सुबह 4:30 बजे है। इसे दिन की शुरुआत करने वाली आरती के रूप में देखा जाता है। मंगला के बाद मंदिर में शृंगार आरती की तैयारी शुरू हो जाती है जोकि सुबह 7 बजे होती है। इस आरती में खाटू श्याम बाबा को साफ-सुथरे और सुंदर वस्त्र के साथ-साथ कई आभूषण पहनाए जाते हैं। वहीं इसके बाद तीसरी आरती यानी भोग आरती होती है। इसका समय दोपहर में 12:30 बजे है। इस आरती के दौरान खाटू श्याम बाबा को भोग लगता है। शाम में 7:30 बजे संध्या आरती होती है। मंदिर में दिन की आखिरी आरती रात में 10 बजे होती है जिसे शयन आरती कहा जाता है।
अलग है पांचों आरती का महत्व
खाटू श्याम में होने वाली हर आरती का अलग महत्व होता है। यहां पर होने वाली मंगला आरती को शुभ शुरुआत से जोड़ा जाता है। वहीं शृंगार आरती में बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भोग आरती में प्रसाद अर्पित किया जाता है। संध्या आरती शाम के समय की जाती है और शयन आरती को दिन के अंत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
मंदिर खुलने और बंद होने का समय
खाटू श्याम मंदिर के पट सुबह 4:30 बजे खुल जाते हैं। मिनट पर खुलता है। मंदिर का पट दोपहर में 12:30 बजे कुछ समय के लिए बंद होता है। इसके बाद मंदिर शाम 4 बजे फिर से खुलता है और रात 10 बजे शयन आरती के बाद बंद हो जाता है।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
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