आज केदारनाथ धाम पहुंचेगी चल विग्रह डोली, क्या है इसके मायने? कपाट खुलने से पहले तक कहां रहते हैं बाबा केदार

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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बाबा केदारनाथ की चल विग्रह डोली आज केदारधाम पहुंच जाएगी। क्या आपको पता है कि कपाट खुलने से पहले तक बाबा केदार कहां रहते हैं? जानें केदारनाथ यात्रा और चल विग्रह डोली से जुड़ी दिलचस्प जानकारियां-

आज केदारनाथ धाम पहुंचेगी चल विग्रह डोली, क्या है इसके मायने? कपाट खुलने से पहले तक कहां रहते हैं बाबा केदार

हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा को सबसे पवित्र यात्राओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में लोग केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा से जिंदगी में पॉजिटिविटी आती है। आज बाबा केदार की चल विग्रह डोली केदारनाथ धाम पहुंच रही है। ऐसे में केदारपुरी वाले क्षेत्र में माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका है। बता दें कि हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले बाबा की डोली को परंपरा के अनुसार धाम तक लाते हैं। रास्ते भर श्रद्धालु फूलों से उनका स्वागत करते हैं। इस बार केदारनाथ मंदिर को कुल 10 कुंतल फूलों से सजाया जा रहा है, जिस वजह से मंदिर की भव्यता देखते ही बन रही है। अब लोगों को मंदिर के पट खुलने का इंतजार है। आइए जानते हैं चल विग्रह डोली से लेकर केदारनाथ धाम के पट खुलने से जुड़ी सारी जानकारी के बारे में-

क्या है चल विग्रह डोली का मतलब?

चल विग्रह डोली का मतलब भगवान की उस मूर्ति से है जोकि खास तौर पर यात्रा के लिए ही रखा जाता है। जब सर्दियों के दिनों में केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं तब बाबा केदार की इसी चल विग्रह डोलीको पालकी में रखकर ऊखीमठ तक ले आया जाता है। ठंडी भर यहीं पर बाबा की पूजा होती है। गर्मी शुरू होते ही डोली को फिर से पदयात्रा करते हुए केदारनाथ धाम लाया जाता है। डोली के पहुंचने का मतलब यही होता है कि अब बाबा अपने धाम में विराजमान होंगे और केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने का समय करीब आ गया है। बाबा के भक्त इस पल में शामिल होना सौभाग्य की बात मानते हैं।

कपाट खुलने से पहले यहां रहते हैं बाबा केदार

दरअसल ठंड के दिनों में केदारनाथ धाम पूरी तरह से ढक जाता है। ऐसे में वहां पर पूजा-अर्चना करना मुश्किल होता है। ऐसे में दीवाली के बाद के समय में ही कपाट बंद कर दिए जाते हैं। बाबा केदार की चल विग्रह डोली को ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिल लाया जाता है। ठंड के मौसम में यहीं पर बाबा की पूजा होती है। मौसम में जैसे ही बदलाव होता है तभी फिर से पदयात्रा करके डोली को केदारनाथ धाम वापस लाया जाता है। इसके बाद ही केदारनाथ धाम के कपाट खुलते हैं और फिर बाबा केदार के दर्शन शुरू हो जाते हैं।

12 साल बाद और भी भव्य दिखी केदारपुरी

2013 की आपदा को भूल पाना मुश्किल है। इस आपदा के बाद केदारपुरी दोबारा निर्माण हुआ। अब केदारपुरी पहले से और भी ज्यादा भव्य दिख रही है। यहां पर लोगों के लिए सुविधाएं भी बढ़ा दी गई हैं। मंदिर परिसर को बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया है। वहीं लिंचोली से आगे बढ़ते ही बर्फ से ढके विशाल पर्वतों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है जो इस यात्रा को और खास बना देता है।

kedarnath opening 22 april

कब खुलेंगे केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट?

बाबा केदार के कपाट कल यानी 22 अप्रैल की सुबह 8 बजे विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री भी पूजा-अर्चना करने वाले हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। इसका इंतजार लोग साल भर करते हैं। वहीं इस चारधाम यात्रा में बाबा केदार के दर्शन को बहुत ही शुभ माना जाता है और कहा जाता है कि सच्चे मन से यहां पर कुछ भी मांगा जाए वो जरूर मनोकामना जरूर पूरी होती है।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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