Kanwar Yatra: कांवड़ को नीचे रख दिया तो क्या करना चाहिए? पहली बार जाने वाले जान लें 6 नियम

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क्या आप पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं? जानें कांवड़ को नीचे रख देने पर क्या माना जाता है और इससे जुड़े धार्मिक नियम और मान्यताएं क्या हैं? साथ ही जानें कि यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

kanwar yatra 2026
कांवड़ यात्रा 2026

सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस दौरान लाखों की संख्या में शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और भगवान शिव को सच्ची श्रद्धा के साथ जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा से जुड़े कई अहम नियम हैं जिनमें से एक है कांवड़ को जमीन पर ना रखने की। अगर आप इस साल पहली बार कांवड़ यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं तो ऐसे ही जरूरी नियमों को समझ लेना जरूरी है।

पहली बार कांवड़ यात्रा पर जाने वालों के मन में कई तरह के सवाल आते हैं वहीं कांवड़ को गलती से जमीन पर रखने का डर भी कई लोगों को होता है। आपने भी इस बारे में कहीं ना कहीं जरूर सुना होगा। अगर नहीं तो जानिए आखिर इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता क्या है और इससे जुड़े जरूरी नियम कौन-कौन से हैं?

कांवड़ को जमीन पर ना रखने की मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगाजल भरने के बाद कांवड़ को सीधा जमीन पर ना रखने का नियम है। इसका लोग कड़ाई के साथ पालन करते हैं। दरअसल इसे कांवड़ यात्रा के सबसे अहम नियमों में से एक माना जाता है। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालु इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखते हैं कि कांवड़ गलती से भी जमीन पर ना रखी जाए। लोग इस नियम को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

अगर हो जाए गलती तो क्या करें?

अगर गलती से भी कांवड़ आप जमीन पर रख दें या ये गिर जाए तो इसे शुभ नहीं माना जाता है और ना ही शुद्ध। ऐसे में कई बार श्रद्धालु फिर से गंगाजल भरकर अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं। हालांकि अलग-अलग जगहों पर इस परंपरा को लेकर नियम अलग भी हो सकते हैं। ऐसे में कई लोग अपने स्थानीय परंपरा के हिसाब से इस नियम को पूरा करते हैं लेकिन इसका सही नियम यही है कि गंगाजल को फिर से भरकर दोबारा यात्रा शुरू की जाए।

आराम करते वक्त कहां रखें कांवड़?

सावन कांवड़ यात्रा आसान नहीं होती है। ऐसे में लोग बीच में रुककर आराम भी करते हैं। इस दौरान कांवड़ को सीधा जमीन पर ना रखकर स्टैंड पर रखना शुभ और सही तरीका माना जाता है। वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्रा मार्ग पर जगह-जगह ये स्टैंड बनाए जाते हैं। ऐसे में लोगों को कांवड़ को रखने की आसानी हो जाती है। सुविधा ना हो तो लोग अपने साथ जाने वाले लोगों को कांवड़ पकड़ाकर थोड़ी देर के लिए आराम कर लेते हैं।

पहली बार कर रहे हैं कांवड़ा यात्रा तो रखें ध्यान

1. कांवड़ यात्रा की शुरू करने के साथ ही शिवजी के जलाभिषेक तक आप सात्विक भोजन ही करें। इस दौरान मांस-मदिरा या फिर सिगरेट जैसी चीजों से दूर रहना है।

2. हर दिन स्नान करना जरूरी है। साफ कपड़े ही पहनें। पूजा करने से पहले या फिर कांवड़ को छूने से पहले अपनी साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।

3. कांवड़ यात्रा के दौरान मन को शांत रखें। किसी से भी झगड़ा ना करें और ना ही खराब शब्दों का इस्तेमाल करें। यात्रा के दौरान किसी का अपमान करना अशुभ माना जाता है।

4. हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान लेदर शूज, बेल्ट या पर्स का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

5. यात्रा के दौरान बोल बम या फिर हर हर महादेव के जयकारे लगाते जाएं।

6. कांवड़ यात्रा सिर्फ पैदल चलने तक ही सीमित ना रखें। इस दौरान हर नियम का पालन करें और मन में किसी के प्रति गलत भावना ना रखें। दूसरों का सम्मान करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते जाएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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