Kamika ekadashi vrat katha in hindi: यहां पढ़ें कामिका एकादशी का महात्मय, पुराणों में हैं इसका जिक्र
Kamika ekadashi vrat katha lyrics: कामिका एकादशी सावन की पहली एकादशी है। इस दिन भगवान श्रहरि की पूजा होती है। इस एकादशी का महात्मय पद्मपुराण में लिखा है। कहा जाता है कि जो इसे पढ़ता है उसे विशेष फल मिलता है।

Ekadashi Vrat katha: सावन मास में कामिका एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस साल कामिका एकादशी का पर्व 9 अगस्त को रखा जा रहा है। इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन जो व्रत करता है उसके स्मरण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। उस दिन श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से भगवान्का पूजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान् श्रीकृष्णके पूजनसे जो फल मिलता है, वह गंगा, काशी, नैमिषारण्य तथा पुष्कर क्षेत्र में भी जाने से भी कई गुना अधिक है।
कथा इस प्रकार
युधिष्ठिर ने पूछा-मधुसूदन, सावन में कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है ?भगवान् श्रीकृष्ण बोले-युधिष्ठिर ने पूछा--गोविन्द, आपको नमस्कार है ! श्रावण के कृष्णपक्ष में कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह एक पापनाशक एकादशी है। इसका महात्मय पहले ब्रह्माजी ने नारदजी के पूछने पर कहा था। नारदजी ने प्रश्न किया था कि मैं आपसे यह सुनना चाहता हूं कि श्रावणके कृष्णपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है, उसके कोन-से देवता हैं और उससे कौन-सा पुण्य होता है ? तब ब्रह्माजी ने कहा कि सावन के महीने में कामिका एकादशी है, जब सिंह राशि के बृहस्पति होने पर और व्यतीपात और दण्डयोग में गोदावरी स्नान से जिस फल की प्राप्ति होती है, वही फल भगवान् श्रीकृष्ण के पूजनसे भी मिलता है। कहा जाता है कि जो समुद्र ओर वनसहित समूची पृथ्वी को दान में देता है और एक तरफ जो कामिका एकादशीका व्रत करता है, वे दोनों के फल एक समान हैं। यह भी कहा जाता है कि अगर एक तरफ आपने ब्याही गाय को दान किया और एक तरफ आपने एकादशी का व्रत किया तो दोनों के फल समान हैं, गायदान और वही फल कामिकाका ब्रत करने वाले को मिलता है। जो व्यक्ति सावन में भगवान् श्रीधरका पूजन करता है, उसके द्वारा सावन में नागों सहित सम्पूर्ण देवताओं की पूजा हो जाती है वो मोक्ष पाता है, इसलिए सभी को इस दिन कामिका एकादशी का व्रत करके श्रीहरिका पूजन करना चाहिए। यह भी कहा जाता है कि लाल मणि, मोती, वैदूर्य और मूंगे आदि भी अगर आप श्रीहरि की पूजा करते हैं तो भी भगवान् विष्णु वैसे संतुष्ट नहीं होते, जैसे तुलसीदल से पूजित होने पर होते हैं। जिसने तुलसी की मझरियों से श्री केशवका पूजन कर लिया है वो भगवान श्रीहरि का प्रिय हो गया। उसके जन्मभर का पाप निश्चय ही नष्ट हो जाता है।यह भी कहा जाता है कि कामिका का ब्रत करने वाला श्रीहरि का रात को जागरण करें और कहा जाता है कि जो ऐसा करता है वो न तो कभी भयंकर यमराज का दर्शन करता है ओर न कभी दुर्गति में ही पड़ता है।
एकादशी पर तुलसी का खास महत्व
कहा जाता है कि जो एकादशी के दिन तुलसी के जो दर्शन करता है, उसके सारे पापों का नाश तुलसी कर देती है, तुलसी के स्पर्श करने पर शरीरको पवित्र बनाती है, प्रणाम करनेपर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचनेप र यमराज को भी भय पहुंचाती है, आरोपित करनेपर भगवान् श्रीकृष्णके समीप ले जाती है और भगवान के चरणों चढ़ाने पर मोक्षरूपी फल प्रदान करती है, उस तुलसी देवीको नमस्कार है।जो मनुष्य एकादशी को दिन-रात तुलसी के पास दीपदान करता है, उसके पुण्य की संख्या चित्रगुप्त भी नहीं जानते हैं। एकादशी के दिन भगवान् श्रीकृष्ण के सामने जो दीपक जलता है, उसके पितृ स्वर्गलोक में जाकर अमृतपान से तृप्त होते हैं।
पद्मपुराण में लिखा यह महात्मय जो पढ़ता है वो समस्त फल पाता है
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हें--युधिष्ठिर !यह तुम्हारे सामने मैंने कामिका एकादशी की महिमा का वर्णन किया है। कामिका सब पातकों को हरने वाली है, इसलिए हमें इसका ब्रत जरूर करना चाहिए। यह स्वर्गलोक और महान् पुण्यफल प्रदान करने वाली है। जो मनुष्य पूरी श्रद्धा से इस माहात्म्य को सुनता है, वो सब पापोंसे मुक्त हो श्रीविष्णुलोकमें जाता है।


