कामिका एकादशी 2026: 9 अगस्त को रखा जाएगा व्रत, जानें क्यों खास है सावन की यह एकादशी
सावन कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी दल अर्पित करने, व्रत रखने और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। जानें कामिका एकादशी की पूजा विधि, व्रत के नियम, चावल न खाने का कारण और 10 अगस्त को होने वाले पारण का सही महत्व।

Kamika Ekadashi 2026: सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के साथ भगवान विष्णु की आराधना का भी खास महत्व बताया गया है। सावन कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है। इस साल कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा।
एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा में पीले फूल, फल और तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा है। भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय मानी जाती है, इसलिए एकादशी की पूजा में इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।
कामिका एकादशी पर क्या करें
कामिका एकादशी के दिन सुबह घर की सफाई करके पूजा की तैयारी करनी चाहिए। भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान को तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान विष्णु मंत्र का जाप किया जा सकता है।
व्रत रखने वाले लोग दिनभर भगवान विष्णु का ध्यान कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार किया जाता है। शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा और आरती करने की भी परंपरा है।
चावल खाने से क्यों बचते हैं
एकादशी के व्रत में चावल और अनाज नहीं खाने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग फल, दूध और दूसरे सात्विक आहार का सेवन करते हैं। हालांकि निर्जल व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन कुछ भी ग्रहण नहीं करते हैं। व्रत अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर रखना चाहिए।
कामिका एकादशी का महत्व
कामिका एकादशी को लेकर धार्मिक मान्यताएं काफी पुरानी हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। भक्त भगवान विष्णु से सुख-शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
इस दिन दान-पुण्य करने का भी महत्व बताया गया है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या दूसरी जरूरी चीजें दान कर सकते हैं।
कब होगा व्रत का पारण
एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में खोला जाता है। इस बार 9 अगस्त को कामिका एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसके अगले दिन 10 अगस्त को द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा।
पारण का सही समय शहर के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए पारण समय को देखना ठीक रहेगा।
धार्मिक मान्यता है कि कामिका एकादशी पर श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। सावन में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


