Kalashtami Puja Muhurat 2026: आज है कालाष्टमी, रात में 2 घंटे रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त, ना करें ये गलतियां

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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आज कालाष्टमी की पूजा होगी और व्रत रखा जाएगा। कालाष्टमी पर भगवान शिव के रौद्र रुप बाबा काल भैरव की पूजा होती है। आइए जानते हैं कि आज की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानिए कि आज की पूजा किस विधि से करनी है?

Kalashtami Puja Muhurat 2026: आज है कालाष्टमी, रात में 2 घंटे रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त, ना करें ये गलतियां

Kalashtami 2026 Today Puja Muhurat: हिंदू धर्म में लगभग हर हफ्ते कोई ना कोई विशेष पूजा जरूर होती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन काल भैरव जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और भाव के साथ काल भैरव की पूजा की जाए तो जिंदगी से किसी भी तरह की नेगेटिविटी और डर खत्म होते जाते हैं। इसके अलावा जिंदगी में आने वाली हर एक बाधा से भी राहत मिलती है। अप्रैल के महीने यानी वैशाख माह में पड़ने वाली कालाष्टमी की सही डेट को लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन बना हुआ था। लगभग हर कोई 9 और 10 अप्रैल की डेट के बीच कन्फ्यूज थे। बता दें कि हिंदू पंचांग के हिसाब से कालाष्टमी की पूजा आज यानी 10 अप्रैल को है। तो आइए जानते हैं कि आज कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? आज के दिन की आसान सी पूजा विधि और पढ़ी जाने वाली चालीसा के बारे में नीचे पढ़ें-

इतने बजे से शुरु हुई अष्टमी की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख के महीने में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी की शुरुआत कल यानी 9 अप्रैल की रात से ही हो चुकी है। तिथि के आरंभ होने का समय रात में 9 बजकर 19 मिनट रहा है। अष्टमी तिथि का समापन आज 10 अप्रैल की रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। पंचांग के हिसाब से उदयातिथि को ध्यान में रखकर कालाष्टमी की पूजा और व्रत आज ही रखा जाएगा।

आज कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त

बता दें कि काल भैरव की पूजा के लिए निशिता मुहूर्त यानी रात का समय सबसे सही माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त रात में 9 से लेकर 11 बजे तक है। इस बीच विधि-विधान के साथ पूजा कर लें। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा ज्यादा फलदायी होती है। ऐसे में इसी समय पूजा करेंगे तो आपको बाबा काल भैरव का आशीर्वाद मिलेगा।

कालाष्टमी पूजा की आसान विधि

काल भैरव भगवान शिव के ही अवतार माने जाते हैं। कालाष्टमी पर शिव जी के सबसे रौद्र रुप माने जाने वाले काल भैरव की पूजा होती है। इस दिन सुबह उठकर स्नान करें। साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा और व्रत का सच्चे मन से संकल्प लें। पूजा घर में भगवान काल भैरव की मूर्ति या फिर तस्वीर रखें। अब गंगाजल और दूध के अलावा पंचामृत से उनका अभिषेक करें। दीया और धूपबत्ती जलाने के बाद काला तिल, सरसों का तेल, फूल और मीठी रोटी अर्पित करें। आज के दिन ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें और काले रंह कुत्ते को मीठी रोटी जरूर खिलाएं।

कालाष्टमी पर ना करें ये गलतियां

कालाष्टमी के दिन मास-मदिरा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से दूर रहें। कोशिश करें कि आज पूजा में देरी ना हो। शुभ मुहूर्त में ही सब करें। नेगेटिव सोच से दूर रहें। आज ना तो किसी का अपना अपमान करें और किसी कुत्ते को सताएं। इन चीजों का ध्यान पूरे दिन रखें।

आज करें काल भैरव चलीसा का पाठ

जय जय श्री काली के लाला, जयति जयति काशी कुतवाला।

जयति बटुक-भैरव भय हारी, जयति काल-भैरव बलकारी॥

जयति नाथ-भैरव विख्याता, जयति सर्व-भैरव सुखदाता।

भैरव रूप कियो शिव धारण, भव के भार उतारण कारण॥

भैरव रव सुनि हवै भय दूरी, सब विधि होय कामना पूरी।

शेष महेश आदि गुण गायो, काशी-कोतवाल कहलायो॥

जटा जूट शिर चंद्र विराजत, कटि करधनी घुंघरू बाजत।

दर्शन करत सकल भय भाजत, जीवन दान दास को दीन्ह्यो॥

वसि रसना बनि सारद-काली, दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली।

धन्य धन्य भैरव भय भंजन, कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा॥

कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा, जो भैरव निर्भय गुण गावत।

अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत, रूप विशाल कठिन दुख मोचन॥

क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन, अगणित भूत प्रेत संग डोलत।

बं बं बं शिव बं बं बोलत, रुद्रकाय काली के लाला॥7॥

महा कालहू के हो काला, बटुक नाथ हो काल गंभीरा।

श्वेत, रक्त अरु श्याम शरीरा, करत तीनहू रूप प्रकाशा॥

भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा, रत्‍न जड़ित कंचन सिंहासन।

व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन, तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं॥

विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं, जय प्रभु संहारक सुनन्द जय।

जय उन्नत हर उमा नन्द जय, भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय॥

बैजनाथ श्री जगतनाथ जय, महाभीम भीषण शरीर जय।

रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय, अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय॥

स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय, निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय।

गहत अनाथन नाथ हाथ जय, त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय॥

क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय, श्री वामन नकुलेश चण्ड जय।

कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय, रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर॥

चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर, करि मद पान शम्भु गुणगावत।

चौंसठ योगिन संग नचावत, करत कृपा जन पर बहु ढंगा॥

काशी कोतवाल अड़बंगा, देयं काल भैरव जब सोटा।

नसै पाप मोटा से मोटा, जाकर निर्मल होय शरीरा॥

मिटै सकल संकट भव पीरा, श्री भैरव भूतों के राजा।

बाधा हरत करत शुभ काजा, ऐलादी के दुःख निवारयो॥

सदा कृपा करि काज सम्हारयो, सुन्दरदास सहित अनुरागा।

श्री दुर्वासा निकट प्रयागा, श्री भैरव जी की जय लेख्यो॥

सकल कामना पूरण देख्यो, जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार।

उस घर सर्वानन्द हो, वैभव बड़े अपार॥

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
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