कल गुरु प्रदोष व्रत की शाम में इतने बजे से करें शिव पूजा, जानें प्रदोष उपाय, विधि और महत्व
Pradosh Time Bhaum Pradosh Vrat 2026: आज गुरु प्रदोष व्रत के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात में 10:36 बजे तक रहेगा। गुरु प्रदोष व्रत के दिन शाम में पूजा करने का विधान है। इस दिन विधि-विधान के साथ पूरे शिव परिवार की पूजा-उपासना की जाती है।

kal Pradosh Time Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष व्रत का संयोग तब बनता है, जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है। यह व्रत भगवान शिव के साथ-साथ बृहस्पति देव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से शत्रुओं पर विजय, सुख-सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, उपाय और महत्व-
गुरु प्रदोष व्रत की शाम में इतने बजे से करें शिव पूजा, जानें प्रदोष उपाय, विधि और महत्व
वैशाख कृष्ण त्रयोदशी तिथि प्रारंभ 14 मई 2026 के दिन सुबह में 11:20 बजे से।
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 15 मई 2026, सुबह 08:31 बजे तक।
पूजा का सबसे शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 07:05 से रात 09:09 के बीच, जिसकी अवधि 02 घंटे 05 मिनट्स रहेगी।
अमृत काल- शाम 07:04 से 08:22 तक (यह समय मानसिक शांति और ध्यान के लिए उत्तम है)।
गुरु प्रदोष व्रत पर कैसे करें पूजा?
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- सुबह भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करें क्योंकि यह गुरु प्रदोष है।
- सूर्यास्त से थोड़ा पहले पुनः स्नान करें।
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
- श्रृंगार: शिवजी को चंदन का तिलक लगाएं, बेलपत्र, धतूरा, और पीले फूल अर्पित करें।
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
- अंत में शिवजी की आरती करें।
गुरु प्रदोष के दिन क्या उपाय करें?
- शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय का जाप करें।
- नौकरी में तरक्की पाने के लिए शिवजी को 21 बेलपत्र पर चंदन से श्री राम लिखकर चढ़ाएं।
- धन से जुड़ी दिक्कतें दूर करने के लिए पूजा के समय शिव चालीसा के साथ कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- विवाह संबंधी अड़चने दूर करने के लिए हल्दी की गांठ और चने की दाल का दान करें।
गुरु प्रदोष व्रत के नियम
- पूजा के दौरान अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
- शांत मन से की गई पूजा ही पूर्ण फल देती है।
- प्रदोष व्रत में पूरा दिन निराहार रहने का विधान है, लेकिन यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार ले सकते हैं।
- इस दिन अन्न, नमक, मिर्च और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का पूरी तरह त्याग करना चाहिए।
- अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत खोलें।
गुरु प्रदोष का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष का व्रत करने से व्यक्ति के कुंडली में स्थित बृहस्पति दोष शांत होता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है, जो जीवन में यश और उच्च पद पाना चाहते हैं। शिव पुराण के अनुसार, प्रदोष काल में महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं, इसलिए इस समय की गई प्रार्थना सीधे उन तक पहुंचती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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