Rangbhari Ekadashi 2026:कब है रंगभरी एकादशी, जानिए महत्व और पूजा विधि

Feb 21, 2026 06:38 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की आने वाली एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं। हर माह में पड़ने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन वर्ष की एकामात्र रंगभरी एकादशी है, जो भगवान शिव को समर्पित है।

Rangbhari Ekadashi 2026:कब है रंगभरी एकादशी, जानिए महत्व और पूजा विधि

हिंदू धर्म में रंगभरी एकादशी का खास महत्व होता है। यह त्योहार होली से पहले आता है। फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की आने वाली एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं। हर माह में पड़ने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन वर्ष की एकामात्र रंगभरी एकादशी है, जो भगवान शिव को समर्पित है। रंगभरी एकादशी को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। चलिए जानते हैं कि इस साल यानी साल 2026 में रंगभरी या आमलकी एकादशी कब है और इस पर्व का महत्व क्या है?

रंगभरी एकादशी पर्व के मानने के पीछे कई किवदंतियां प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि को भगवान शिव देवी पार्वती को विवाह के बाद पहली बार अपनी नगरी काशी लेकर आए थे। शिव जी देवी पार्वती का गौना कराकर पहली बार आए थे तो भक्तों ने उनका स्वागत रंग और गुलाल से किया था। इस वजह से हर साल फाल्गुन शुक्ल एकादशी यानि रंगभरी एकादशी को काशी विश्वनाथ जी और माता गौरी को पूजा के समय रंग और गुलान अर्पित करते हैं।

इस वर्ष फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी 2026 की रात 12:33 बजे से शुरू होगी और उसी दिन रात 10:32 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के मुताबिक इस साल रंगभरी एकादशी या आंवला एकादशी का व्रत 27 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

रंगभरी एकादशी की पूजा विधि
-रंगभरी एकादशी का व्रत करने वालों को प्रात: काल जल्दी अछकर स्नान आदि कर लेना चाहिए।
- घर के मंदिर में घी से दिया जलाएं। फिर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती को गंगाजल से अभिषेक कराएं और फूल माला अर्पित करें।
- देशी घी का दीपक जलाकर आरती और मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के बाद आरती करें और एकादशी का व्रत रखें।
- पूजा के अंत में भगवान को भोग लगाएं और लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
- इस दिन आंवले के पेड़ की भी पूजा की जाती है।

व्रत का महत्व
रंगभरी एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। रंगभरी एकादशी का व्रत रखेन से मोक्ष की प्राप्ति होती है। रंगभरी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ की भी पूजा शुभ माना जाता है। आंवले केवृक्ष को सभी प्रकार के पापों को नष्ट करने वाला शुभ वृक्ष माना जाता है।रंगभरी एकादशी के दिन आंवला खाना शुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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