Chaitra Masik Shivratri 2026: कब है चैत्र मासिक शिवरात्रि? इस तरह करें पूजा, प्रसन्न होंगे महादेव
chaitra masik shivratri 2026: पंचांग के मुताबिक प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस तरह पूरे साल में 12 बार मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस वक्त चैत्र का महीना चल रहा है। चलिए जानते हैं कि चैत्र में कब मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाए।

chaitra masik shivratri 2026: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। यह भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन महादेव के साथ ही माता पार्वती की पूजा की जाती है। पंचांग के मुताबिक प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस तरह पूरे साल में 12 बार मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस वक्त चैत्र का महीना चल रहा है। चलिए जानते हैं कि चैत्र में कब मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाए।
चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के मुताबिक 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन चैत्र कृष्ण चतुर्दशी तिथि 17 मार्च को सुबह 9 बजकर 23 मिनट से 18 मार्च के सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक इस बार चैत्र मासिक शिवरात्रि का व्रत 17 मार्च 2026 को रखा जाएगा। भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए इस दिन देर रात का समय अधिक शुभ माना जाता है। इस दौरान भक्त भगवान शिव का अभिषेक करते हैं और मंत्र-जप व आरती करते हैं।
निशिथ काल
जो भी साधक मासिक शिवरात्रि पर निशिथ काल में पूजा करते हैं, उनके लिए 17 मार्च की देर रात में 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।
चैत्र मासिक शिवरात्रि पूजन सामग्रीचैत्र मासिक शिवरात्रि पूजन सामग्री की लिस्ट में घी, दही, फूल, फल, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद, गंगाजल, सफेद चंदन, काला तिल, कच्चा दूध, हरी मूंग दाल, शमी का पत्ता, पंचामृत, धूप, दीप शामिल होनी चाहिए।
चैत्र मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद घर के मंदिर या किसी शिवालय में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करें।
महाशिवरात्रि की तरह भव्य पूजा आवश्यक नहीं होती, सामान्य पूजन भी किया जा सकता है।
पूजा घर में सबसे पहले शिवलिंग का अभिषेक घी, दही, जल, शक्कर आदि के साथ करें।
अभिषेक करने के साथ-साथ शिवजी को बेलपत्र और धतूरा जरूर अर्पित करें।
मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के रुद्राभिषेक करने का भी खास महत्व होता है।
सभी फल, बेलपत्र, धतूरा आदि को साफ करके ही शिवलिंग पर अर्पित करें।
शिवजी की पूजा के समय शिव चालीसा, शिव श्लोक और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।
फिर, पूरे दिन व्रत करने के बाद आप शाम के समय फलाहार कर सकते हैं।
वहीं, शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें और उनके मंत्रों का जाप करें। साथ ही, मासिक शिवरात्रि व्रत का पाठ भी अवश्य करना चाहिए।
शिवरात्रि का पूजन कई लोग मध्य रात्रि में भी करते हैं, जिसे सबसे उत्तम माना गया है। इसके लिए रात 12 बजे के बाद शिवजी की पूजा करना फलदायी माना जाता है।
व्रत का पारण
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अगले दिन सुबह भगवान शिव की पूजा करने के बाद व्रत का पारण करें और सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान दें।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान


