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आज कालभैरव जयंती पर सुबह से शाम तक इन मुहूर्त में करें पूजा, जानें पूजा की विधि

आज कालभैरव जयंती पर सुबह से शाम तक इन मुहूर्त में करें पूजा, जानें पूजा की विधि

संक्षेप:

Kalbhairav ​​Jayanti 2025 : आज कालभैरव जयंती के दिन 2 शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है, जिससे दिन का महत्व काफी बढ़ गया है। इस दिन विधिवत भगवान शिव के कालभैरव रूप की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। 

Nov 12, 2025 09:09 am ISTShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Kalbhairav ​​Jayanti 2025: आज मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालभैरव जयन्ती मनायी जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 नवंबर को 11:08 पी एम पर अष्टमी तिथि प्रारम्भ होगी, जिसका समापन 12 नवंबर को 10:58 पी एम पर होगा। आज के दिन 2 शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है। इस दिन सुबह 08:02 मिनट से शुक्ल योग का निर्माण होगा, जिसके बाद ब्रह्म योग रहेगा। सनातन धर्म में भगवान कालभैरव को भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। इस दिन विधिवत भगवान शिव के कालभैरव रूप की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं कालभैरव जयंती पर पूजा के शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि-

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आज कालभैरव जयंती पर सुबह से शाम तक इन मुहूर्त में करें पूजा

  1. ब्रह्म मुहूर्त 04:56 ए एम से 05:49 ए एम
  2. प्रातः सन्ध्या 05:22 ए एम से 06:41 ए एम
  3. अभिजित मुहूर्त कोई नहीं
  4. विजय मुहूर्त 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
  5. गोधूलि मुहूर्त 05:29 पी एम से 05:55 पी एम
  6. सायाह्न सन्ध्या 05:29 पी एम से 06:48 पी एम
  7. अमृत काल 04:58 पी एम से 06:35 पी एम
  8. निशिता मुहूर्त 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 13
  9. लाभ - उन्नति 06:41 ए एम से 08:02 ए एम
  10. अमृत - सर्वोत्तम 08:02 ए एम से 09:23 ए एम
  11. शुभ - उत्तम 10:44 ए एम से 12:05 पी एम
  12. चर - सामान्य 02:47 पी एम से 04:08 पी एम
  13. लाभ - उन्नति 04:08 पी एम से 05:29 पी एम
  14. शुभ - उत्तम 07:08 पी एम से 08:47 पी एम
  15. अमृत - सर्वोत्तम 08:47 पी एम से 10:26 पी एम
  16. चर - सामान्य 10:26 पी एम से 12:05 ए एम, नवम्बर 13

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पूजा की विधि: सुबह में स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान कालभैरव की पूजा के लिए पूजास्थल तैयार करें। भगवान शिव और कालभैरव की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें तिल, सरसों का तेल, और काला तिल अर्पित करें। कालभैरव अष्टक या उनकी स्तुति करें। फलों का भोग लगाएं। आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें। काले कुत्तों को भोजन भी कराएं। यह बहुत ही शुभ माना जाता है। कालाष्टमी के दिन उपवास करने और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दान करने का महत्व है। काशी में कालभैरव मंदिर में देश विदेश से हजारों लोग पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं। यहां भक्त भगवान कालभैरव के दर्शन कर उनसे अपने पापों की मुक्ति और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

व्रत का लाभ

  1. कालभैरव की पूजा से शत्रुओं पर विजय मिलती है।
  2. जीवन की नकारात्मकता और भय दूर होता है।
  3. मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
  4. इस दिन भगवान कालभैरव का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रयास करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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