
कैसे काल भैरव के संपर्क में आकर मार्कण्डेय ने काल को बांध दिया, समय वहीं रोक दिया
Kaal Bhairav Puja:आप सिर्फ समय का खिलौना हैं। आपको काल भैरव के उस आयाम तक जाना है, जब आप समय के स्वामी बन सकें। यदि आप समय के स्वामी बन गए हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप जीवन और जीवन-प्रक्रिया के भी स्वामी बन गए हैं।
आप सिर्फ समय का खिलौना हैं। आपको काल भैरव के उस आयाम तक जाना है, जब आप समय के स्वामी बन सकें। यदि आप समय के स्वामी बन गए हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप जीवन और जीवन-प्रक्रिया के भी स्वामी बन गए हैं।एक सुंदर कहानी है। मार्कण्डेय बालक थे। उनके जन्म से पहले ही उनकी आयु का विकल्प चुना गया था, उनके माता-पिता द्वारा। भगवान ने उन्हें वरदान स्वरूप एक विकल्प दिया कि उनके एक पुत्र होगा, जो 100 साल तक जीवित रहेगा, लेकिन मूर्ख होगा। दूसरा विकल्प दिया कि अत्यंत बुद्धिमान पुत्र होगा, जो केवल 16 साल तक जीवित रहेगा।माता-पिता बुद्धिमान थे। उन्होंने निर्णय लिया कि उनके बुद्धिमान संतान हो। वरदान स्वरूप उन्हें मार्कण्डेय के रूप में पुत्र की प्राप्ति हुई। जब उनके पुत्र की मृत्यु के दिन करीब आने लगे, तो उन्होंने उसे यह बात बता दी। बच्चा विशेष रूप से ज्ञानी था। जब मृत्यु के दिन यमराज उसके प्राण लेने के लिए आए, तो मार्कण्डेय ने बस एक सरल कार्य किया। उन्होंने काल भैरव के रूप में शिवलिंग को पकड़ लिया। जैसे ही उन्होंने लिंग को पकड़ा, समय रुक गया और मृत्यु उनके करीब नहीं आई।
फिर उनके अंदर का वह आयाम खुल गया, जहां अब उनके लिए समय उपलब्ध नहीं था। कहते हैं कि वह एक साल के लड़के के रूप में जीवित रहे, क्योंकि वे काल भैरव के संपर्क में आए, तो उन्होंने काल को बांध दिया और समय को वहीं रोक दिया।
काल का अर्थ है- समय। काल का अर्थ शून्यता भी है। काल का अर्थ चक्र भी है। काल का अर्थ अन्य स्तरों पर चक्रों से भी परे है। इनमें काल, काल भैरव, महाकाल को सूक्ष्मदर्शी तरीकों से समझा जा सकता है। ये सभी अनुभव के विभिन्न आयामों में एक ही चीज के बारे में बात कर रहे हैं। अभी समय का हमारा अनुभव प्रकृति के चक्रों के कारण है। जो कुछ भी चक्रों में है, हम माप सकते हैं- वह कितनी बार घूमता है, इस तरह हम समय की समझ में आ रहे हैं।
काल भैरव बस उनका एक अवतार बने हैं, ताकि हम उन तक पहुंच सकें। एक ऊर्जा स्थान बन सकें, जहां हम उन तक पहुंच सकें। मुझे लगता है कि तमिल में जिस तरह से इस शब्द का इस्तेमाल किया गया है, वह बहुत उपयुक्त है। जब कोई मर जाता है, तो वे कहते हैं, ‘कलाम आयतांगा’- इसका मतलब है कि उसका समय समाप्त हो गया है। यह बहुत सरल और उत्तम है। बस इतना ही हुआ, समय खत्म हो गया।
ज्यादातर यह पता ही नहीं चलता कि समय पर बात हो रही है। उन्हें लगता है कि वे हमेशा के लिए हैं। नहीं, हम समय के खिलौने हैं। आप कुछ करते हैं, तो खत्म हो जाते हैं। आप कुछ नहीं करते हैं, तो खत्म हो जाते हैं।आप सिर्फ समय का खिलौना हैं। तो, आपको काल भैरव के उस आयाम तक जाना है, जब आप समय के स्वामी बन सकें। यदि आप समय के स्वामी बन गए हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप जीवन और जीवन-प्रक्रिया के भी स्वामी बन गए हैं।





