Pradosh Vrat 2026: 12 जुलाई को है रवि प्रदोष व्रत, नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
रवि प्रदोष व्रत 12 जुलाई को है। द्रिक पंचांग के हिसाब से जानें कि इस बार शिव पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है। देखें इस दिन का प्रदोष काल समय क्या रहेगा?

12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत है। इस बार तारीख को लेकर लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन है। दरअसल एकादशी दो दिन पड़ रही है और इसके अगले ही दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। ऐसे में तमाम लोगों में ये कन्फ्यूजन बना हुआ है कि प्रदोष व्रत 11 को है या फिर 12 जुलाई को। द्रिक पंचाग के हिसाब से जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत 12 तारीख को है। सनातन धर्म में इस व्रत का खास महत्व माना जाता है। हर महीने आने वाले इस व्रत का इंतजार हर शिवभक्त को होता है। इस व्रत की खास बात ये बात ये है कि ये जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी हिसाब से पड़ता है। इस बार ये व्रत रविवार को पड़ेगा और इसी वजह से इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
मान्यता है कि इस खास दिन पर अगर भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाए तो हर मनोकामना पूरी होने के साथ-साथ जिंदगी की तमाम परेशानियां भी दूर होती हैं। जानिए आखिर इस बार पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इस व्रत की पूजा विधि कैसी है?
रवि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जुलाई की रात 2:04 बजे से होगी। इसका समापन रात में 10:29 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए रवि प्रदोष व्रत 12 जुलाई के दिन ही रखा जाएगा। रही बात पूजा के शुभ मुहूर्त की शाम को 7.22 से रात 9.24 बजे तक रहेगा। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करनी ही शुभ मानी जाती है। इसी दौरान शिवलिंग का जलाभिषेक करना शुभ होता है। साथ ही इसी दौरान शिवमंत्रों का जाप करने से भी खूब लाभ मिलता है।
ऐसे करें प्रदोष व्रत की पूजा
प्रदोष व्रत की सुबह जल्दी उठकर नहा लें। साफ कपड़े पहनें और इस दौरान भगवान शिव का ध्यान करें। सच्चे और शांत मन से व्रत का संकल्प लें। शाम में प्रदोष काल के दौरान शिव पूजा करें। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। धूप और दीया जलाएं। भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा पढ़ें और आरती करें। पूजा समापन पर अपनी मनोकामना भगवान से कहें और परिवार की सुख-शांति के लिए कामना करें।
व्रत के समय रखें ध्यान
प्रदोष व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें। अपनी श्रद्धा के हिसाब से फलाहार रखें। इस दिन किसी से बहसबाजी ना करें। अपना मन शांत रखें। किसी का भी अपमान ना करें। जरूरतमंदों की सेवा करें। अपने सामर्थ्य के हिसाब से दान करें। पूजा पूरी हो जाए तो इसके बाद ही अपना व्रत खोलें।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
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