जुलाई में शनि की चाल में होंगे दो बड़े बदलाव, कई राशियों पर दिखेगा असर
वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है। शनि की चाल सबसे धीमी मानी जाती है, इसलिए इनके छोटे से बदलाव का भी असर लंबे समय तक देखने को मिलता है। जुलाई 2026 में शनि देव की स्थिति में दो अहम परिवर्तन होने जा रहे हैं।

वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है। शनि की चाल सबसे धीमी मानी जाती है, इसलिए इनके छोटे से बदलाव का भी असर लंबे समय तक देखने को मिलता है। जुलाई 2026 में शनि देव की स्थिति में दो अहम परिवर्तन होने जा रहे हैं। पहला बदलाव 2 जुलाई को होगा, जब शनि रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 27 जुलाई से शनि वक्री हो जाएंगे। ज्योतिष में इन दोनों घटनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को शनि देव रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे।
रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध ग्रह है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस परिवर्तन का असर अलग-अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है।
माना जा रहा है कि मेष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि के लोगों को इस दौरान कामकाज में थोड़ी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कुछ लोगों पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। नौकरी और कारोबार से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह दी जाती है। मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है, इसलिए जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा।
वहीं वृषभ और तुला राशि के लोगों के लिए यह समय कुछ राहत लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। कुछ लोगों को पुराने प्रयासों का परिणाम मिलने के संकेत भी मिल सकते हैं। हालांकि किसी भी बड़े फैसले से पहले स्थिति का सही आकलन करना जरूरी रहेगा।
जुलाई का दूसरा बड़ा बदलाव 27 जुलाई को होगा।
इस दिन शनि मीन राशि में वक्री हो जाएंगे। शनि की यह वक्री अवस्था करीब 138 दिनों तक रहेगी और 11 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी।
ज्योतिष में शनि की वक्री चाल को आत्ममंथन और पुराने कार्यों की समीक्षा का समय माना जाता है। इस दौरान कई लोगों को अधूरे काम पूरे करने का मौका मिल सकता है। पुरानी योजनाएं दोबारा चर्चा में आ सकती हैं। कुछ लोगों को पहले किए गए कार्यों का परिणाम भी देखने को मिल सकता है।
मिथुन, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए यह समय खास माना जा रहा है। आर्थिक मामलों में सुधार के अवसर मिल सकते हैं। कुछ लोगों को करियर में नई दिशा भी मिल सकती है। हालांकि किसी भी निवेश या बड़े खर्च को लेकर सावधानी बरतना जरूरी रहेगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा से गुजर रहे हैं, वे जुलाई में कुछ पारंपरिक उपाय कर सकते हैं। शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप भी किया जाता है। जरूरतमंद लोगों को काली उड़द, काले तिल या छाते का दान करना भी शुभ माना गया है। वहीं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति मिलने की मान्यता है।
ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि शनि के ये दोनों बदलाव कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रह सकते हैं। ऐसे में जुलाई का महीना धैर्य, अनुशासन और सोच-समझकर कदम उठाने का समय माना जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
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