जया एकादशी व्रत पारण कब करना होगा सही? जानें टाइम और संपूर्ण पूजा विधि

Jan 29, 2026 09:45 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी कहा जाता है। 29 मार्च को जया एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

जया एकादशी व्रत पारण कब करना होगा सही? जानें टाइम और संपूर्ण पूजा विधि

Jaya Ekadashi Vrat 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी कहा जाता है। 29 मार्च को जया एकादशी व्रत रखा गया। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर सच्चे मन से श्रीहरि का ध्यान करते हैं। अगर आपने भी जया एकादशी का व्रत रखा था तो व्रत खोलने यानी पारण का सही समय और विधि जानना बहुत जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता।

जया एकादशी का पारण कब करें?- शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाता है। हालांकि, द्वादशी तिथि की पहली चौथाई अवधि को हरि वासर कहा जाता है। इस समय पारण करना वर्जित माना गया है। इसलिए हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना शुभ होता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, जया एकादशी का पारण 30 जनवरी 2026, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन सूर्योदय सुबह करीब 7:10 बजे होगा, जबकि द्वादशी तिथि का समापन लगभग 11:09 बजे होगा। ऐसे में व्रत खोलने का सबसे शुभ समय सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे के बीच रहेगा। अगर कोई व्यक्ति इस समय के दौरान पारण नहीं कर पाता है, तो उसे दोपहर के बाद ही व्रत खोलना चाहिए।

जया एकादशी व्रत की पारण विधि

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व बताया गया है। पद्म पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में एकादशी व्रत और उसके पारण की विधि को विस्तार से समझाया गया है। शास्त्रों के अनुसार, अगर व्रत सही तरीके से न खोला जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए पारण का समय और तरीका दोनों बेहद जरूरी माने गए हैं। पुराणों के अनुसार, एकादशी व्रत के पारण के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए, ताकि तन और मन दोनों शुद्ध हो सकें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु या श्रीहरि की मूर्ति अथवा तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए। पूजा में तुलसी दल, पीले फूल, चंदन, अक्षत और फल अर्पित करना शुभ माना गया है। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 11 या 108 बार जाप करना चाहिए और व्रत के दौरान अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा याचना करनी चाहिए, जैसा कि पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है। इसके बाद तुलसी के पत्तों से पारण करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। सामान्य रूप से 3, 5 या 7 तुलसी के पत्ते ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। पारण के बाद हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए। ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, अनाज का सेवन द्वादशी तिथि पूरी होने के बाद ही करना उचित और शुभ माना गया है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!