Jaya Ekadashi Vrat Katha in hindi: जया एकादशी पर आज पढ़ें कथा, मिलेगा व्रत का फल, कैसे गंधर्व जोड़े की पिशाचता हुई खत्म
Jaya Ekadashi Vrat ki Katha in Hindi: माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी आज 29 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को यह व्रत बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से ब्रह्म हत्या का पाप भी क्षमा हो जाता है, पिशाच योनि से भी मुक्ति मिलती है।

Jaya Ekadashi Vrat ki Katha in Hindi:माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी इस साल 29 जनवरी को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को यह व्रत बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से ब्रह्म हत्या का पाप भी क्षमा हो जाता है, पिशाच योनि से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन चावल नहीं कहा जाता है। पूरे दिन व्रत करके फलाहार कर सकते हैं और अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण किया जाता है। भगवान् श्रीकृष्ण ने माघ मासके शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व बताया है। इस साल जया एकादशी के दिन बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं। जया एकादशी की कथा इस दिन जरूर पढ़ी जाती है। यहां पढ़ें जया एकादशी व्रत कथा-
अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से प्रश्न करते है कि हे भगवान ! अब कृपा कर आप मुझे माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या महत्त्व है विस्तारपूर्वक बताएं। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी में किस देवता की पूजा करनी चाहिए तथा इस एकादशी व्रत की कथा क्या है ? उसके करने से किस फल की प्राप्ति होती है शीघ्र ही बताएं?
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। भगवान कृष्ण ने कहा है कि यह तिथि पापों को हरने वाली है | इस एकादशी का व्रत करने पर मनुष्यों को कभी प्रेतयोनिमें नहीं जाना पड़ता। इसकी कहानी इस प्रकार है
एक समय की बात है, स्वर्गलोक में देवराज इन्द्र राज्य करते थे। देवगण पारिजात वृक्षों से भरे हुए नंदनवन में एक बार अप्सराओं के साथ घूम रहे थे। नंदन वन में उत्सव का आयोजन हो रहा था। इसमें देवता, ऋषि मुनि सभी मौजूद थे। उस समय गंधर्व गा रहे थे तथा गंधर्व कन्याएं नृत्य कर रही थी। इंद्र गंधर्वों के नृत्य का आनंद ले रहे थे। उसमें गन्धर्व गान कर रहे थे, जिनमें पुष्पदन्त, चित्रसेन और उसका पुत्र--ये तीन मुख्य कलाकार थे। चित्रसेन की पत्नी का नाम मालिनी था। मालिनी से एक कन्या उत्पन्न हुई थी, जो पुष्पवन्तीके नाम से विख्यात थी। पुष्पदन्त गन्धर्व के एक पुत्र था, जिसको लोग माल्यवान् कहते थे | माल्यवान् पुष्पवन्ती के रूप पर अत्यन्त मोहित था। ये दोनों भी इन्द्र के लिए नृत्य करने के लिए आए थे। इन दोनों का गान हो रहा था, इनके साथ अप्सराएंभी थीं। परस्पर अनुराग के कारण ये दोनों मोह में बए हए ।
एक दूसरे में खोने के कारण वो वे शुद्ध गान न गा सके। कभी ताल भंग हो जाता और कभी गीत बंद हो जाता था। इन्द्र ने इस पर विचार किया और इसमें अपना अपमान समझकर वे क्रोधित हो गए। इंद्र ने दोनों को शाप दिया और कहा कि ओ मूर्खों! तुम दोनों को धिक्कार है! क्योंकि तुमने संगीत जैसी पवित्र साधना का तो अपमान किया ही है साथ ही सभा में उपस्थित गुरुजनों का भी अपमान किया है। इंद्रा भगवान के शाप के प्रभाव से दोनों पृथिवी पर हिमालय पर्वत के जंगल में पिशाची जीवन व्यतीत करने लगे। एक दिन पिशाच ने अपनी पत्नी पिशाची से कहा कि हमने कौन-सा पाप किया है, जिससे यह पिशाच-योनि प्राप्त हुई है ? नरक का कष्ट अत्यन्त भयंकर है तथा पिशाचयोनि भी बहुत दुःख देनेवाली है । दैवयोगसे उन्हें माघ मास की एकादशी तिथि प्राप्त हो गई । उस दिन उन दोनों ने सब प्रकार के आहार त्याग दिए। जलपान तक नहीं किया। किसी जीव की हिंसा नहीं की, यहां तक कि फल भी नहीं खाया। इससे दुखी होकर वो दोनों एक पीपल के पेड़ के पास बैठ गए। सूर्यास्त हो गया । उन्हें नींद नहीं आयी | वे रति या और कोई सुख भी नहीं पा सके | सूर्योदय हुआ । द्वादशीका दिन आया। उन पिशाचों के द्वारा जया के उत्तम ब्रत का पालन हो गया । उन्होंने रातमें जागरण भी किया था।
उस ब्रतके प्रभावसे तथा भगवान् विष्णुकी इक्तिसे उन दोनोंकी पिशाचता दूर हो गई। पुष्पवत्ती ओर माल्यवान् अपने पूर्वरूपमें आ गए। वे दोनों मनोहर रूप धारण करके विमान पर बैठे ओर स्वर्गलोक में चले गए । वहां देवराज इन्द्रके सामने जाकर दोनों ने बड़ी प्रसन्नताके साथ उन्हें प्रणाम किया।
माल्यवान् बताया कि भगवान् वासुदेव की कृपा और जया एकादशी व्रत से हमारी पिशाचता दूर हुई है। इन्द्र ने कहा कि तो अब तुम दोनों मेरे कहने से सुधापान करो। जो लोग एकादशीके ब्रतमें तत्पर और भगवान् श्रीकृष्णके शरणागत होते हैं, वे हमारे भी पूजनीय हैं। भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं कि इसलिए सभी का एकादशी का व्रत करना चाहिए। यह एकादशी ब्रह्महत्या का पाप भी दूर करने वाली है। इस माहात्म्यके पढ़ने ओर सुननेसे अग्निष्टोम यज्ञका फल मिलता है। इस प्रकार एकादशी व्रत करने से सभी का जीवन उत्तम हो।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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