कल या परसों जन्माष्टमी कब? 15 साल बाद बना अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग, जानें पूजा का समय

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Janmashtami Puja ka samay: हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जानें जन्माष्टमी व्रत की तारीख और मुहूर्त।

janmashtami kitne tarikh ko hai
जन्माष्टमी व्रत किस दिन रखा जाएगा?

Janmashtami puja muhurat 2026: कृष्ण जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में बाल गोपाल का भव्य स्वागत किया जाता है। कुछ कान्हा के लिए सुंदर झूला सजाते हैं तो कुछ अपने हाथों से लड्डू गोपाल के लिए नए वस्त्र बनाते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्यरात्रि को हुआ था। इस साल अष्टमी तिथि दो दिन होने के कारण लोगों के बीच जन्माष्टमी की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति है। आइए जानते हैं कि जन्माष्टमी कब मनाना उत्तम।

4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। गृहस्थ और वैष्णव दोनों संप्रदाय के लिए जन्माष्टमी का व्रत और उत्सव इसी दिन पड़ रहा है। इससे जन्माष्टमी के तारीख की असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 02 बजकर 25 मिनट पर प्रारंभ होगी और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर 2026 को रात 12:29 बजे से प्रारंभ होगा और 5 सितंबर को रात 11:04 बजे तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मध्य रात्रि में मनाने की परंपरा है। 4 सितंबर को निशिता काल में विधि-विधान से लड्डू गोपाल का पूजन किया जाएगा।

अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का मिलन:

पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए अष्टमी युक्त रोहिणी नक्षत्र जिस भी रात्रि को कुछ पल के लिए भी मिलता है उस दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाना और व्रत रखना श्रेयस्कर होता है। 4 सितंबर को मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र मिल रहा है, इसलिए इस व्रत रखना और उत्सव मनाना लाभप्रद रहने वाला है। माना जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी महासंयोग में हुआ था। इस साल करीब 15 साल बाद ऐसा शुभ संयोग बना है।

पंडित उपाध्याय आगे बताते हैं कि जन्माष्टमी व्रत को रखने का एक संयोग होता है जिसमें मध्य रात्रि, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र अनिवार्य होते हैं और इन तीनों का मिलन जिस दिन होता है उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पूजन का उत्तम मुहूर्त 2026:

जन्माष्टमी पर निशिता काल पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 45 मिनट की होगी। मध्य रात्रि का क्षण रात 12 बजकर 20 मिनट पर रहेगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 11 बजकर 29 मिनट बताया गया है। दोपहर के समय पूजा का अभिजित मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा।

जन्माष्टमी व्रत पारण का समय:

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद किया जा सकता है। इसलिए 5 सितंबर को सुबह 06 बजकर 01 मिनट के बाद चरणामृत और प्रसाद (पंजीरी) ग्रहण करके व्रत खोला जा सकेगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


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परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

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