
Janmashtami Sanyog: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि का अद्भुत योग
Janmashtami Sanyog:श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि का अद्भुत योग बन रहा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भरणी, कृतिका और रोहिणी नक्षत्र के भी योग हैं, जो इस दिन को और भी विशेष बना रहा है।
Lord krishna janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि का अद्भुत योग बन रहा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भरणी, कृतिका और रोहिणी नक्षत्र के भी योग हैं, जो इस दिन को और भी विशेष बना रहा है। वेदाचार्य बताते हैं कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कृष्ण को पूजने वाले लोग अपनी इंद्रियों पर विजय पाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष के रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस वर्ष भी कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं। वैसे तो अष्टमी तिथि का प्रवेश शुक्रवार की रात 11.48 बजे हो रहा है, लेकिन उदया तिथि में 16 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पंचांग बताते हैं कि अगर ऐसी स्थिति बने कि जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का मिलन नहीं हो रहा हो तो उदया तिथि को मान्यता देकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा सकती है। ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक 16 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। हालांकि रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त की अहले सुबह 4.38 बजे से लग रहा है।
जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में तैयारी : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर शहर के सभी मंदिरों में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। शक्ति मंदिर, खड़ेश्वरी मंदिर, स्वामी नारायण मंदिर, सहित अन्य मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में रातभर पूजा-पाठ व कीर्तन होता है। लड्डू गोपाल को झूले में झुलाया जाता है। घरों में भी लोग गोपाल की पूजा करते हैं। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का जन्मोत्सव मनाते हैं। भगवान को भोग लगाते हैं। पीले वस्त्र अर्पित करते हैं। इस दौरान विविध सांस्कृतिक महोत्सव, भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, श्रीमद्भागवत कथा व कीर्तन होगा। भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा।





