जन्माष्टमी पर लाडली जगमोहन जूं सरकार का अनोखा शृंगार, ठाकुरजी पहनेंगे राजस्थानी साफा और वृंदावन की पोशाक
जन्माष्टमी पर होगा लाडली जगमोहन जूं सरकार का अनोखा शृंगार। ठाकुरजी राजस्थानी साफा और वृंदावन की पोशाक में दर्शन देंगे। जानें पूरी तैयारियां और कार्यक्रम।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आते ही मंदिरों में ठाकुरजी के शृंगार की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध मचकुंड तीर्थ के पास लाडली जगमोहन जूं सरकार का शृंगार खास होने जा रहा है। ठाकुरजी राजस्थानी साफा पहनकर भक्तों को दर्शन देंगे। वृंदावन से आई खास पोशाक में राजस्थानी परंपरा और ब्रज की भक्ति दोनों का मिश्रण साफ दिखेगा। भक्तों में इस अनोखे शृंगार को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
राजस्थानी साफा और खास पोशाक
जन्माष्टमी पर इस बार ठाकुरजी को राजस्थानी परंपरा की पगड़ी पहनाई जाएगी। ठाकुरजी के पोशाक को वृंदावन के मुस्लिम कारीगरों ने तैयार किया है। मोतियों और सितारे की बारीक कारीगरी से सजी यह पोशाक बहुत ही आकर्षक लग रही है। रंगों और पारंपरिक डिजाइन ने इसे और खूबसूरत बना दिया है। राजस्थानी संस्कृति और ब्रज की भक्ति का यह अनूठा मेल शृंगार में चार चांद लगाएगा। भक्त इस रूप में ठाकुरजी के दर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
जन्माष्टमी महोत्सव की रूपरेखा
जन्माष्टमी महोत्सव के तहत 1 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक श्री लाडली जगमोहन जी का विशेष अभिषेक और सहस्रार्चन होगा। 2 और 3 सितंबर को ठाकुरजी का शृंगार किया जाएगा। 4 सितंबर को 56 भोग, फूल बंगला झांकी और भजन संध्या के बाद रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महाअभिषेक होगा। महंत कृष्णदास ने इन कार्यक्रमों की जानकारी दी है।
ब्रज के बधाई गीत और कलाकार
जन्माष्टमी की रात जैसे ही कान्हा के जन्म का समय नजदीक आएगा, मंदिर परिसर ब्रज के पारंपरिक बधाई गीतों से गूंज उठेगा। वृंदावन से आने वाले गायक कान्हा के जन्मोत्सव पर बधाई गीत पेश करेंगे। हर्ष, राधे किशोरी और मोहन बृजवासी भजनों की प्रस्तुति देंगे। वहीं अलीगढ़ की सुंदर झांकियां भी लोगों का मन मोहेंगी। इस बार लाडली जगमोहन जूं सरकार के प्रांगण में ब्रज की मिठास से भरे पारंपरिक गीतों के बीच भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा।
मचकुंड में चरण चिन्ह पहाड़ी की सजावट
मचकुंड में इस बार पहली बार चरण चिन्ह पहाड़ी को सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं को यहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण चिन्ह के दर्शन आसानी से हो सकेंगे। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने मचकुंड महाराज के यज्ञ को इसी पहाड़ी पर बैठकर देखा था, उसी समय उनके पैरों के निशान शिला पर छप गए थे। पहाड़ी पर शिला और गुफा पर पूजन कार्यक्रम भी होगा। इस बार यह नई व्यवस्था भक्तों के लिए खास आकर्षण बन गई है।
भक्ति और संस्कृति का संगम
इस बार का जन्माष्टमी महोत्सव भक्ति के साथ सांस्कृतिक रंग भी लेकर आया है। राजस्थानी साफा और वृंदावन की पोशाक का मेल अलग पहचान बना रहा है। वहीं पारंपरिक गीत, झांकियां और पहली बार सजाई गई चरण चिन्ह पहाड़ी उत्सव को यादगार बनाएगी।
जन्माष्टमी पर लाडली जगमोहन जूं सरकार का यह अनोखा शृंगार भक्तों के लिए खास आकर्षण बनने वाला है। राजस्थानी साफा और वृंदावन की पोशाक में ठाकुरजी के दर्शन सभी के लिए यादगार रहेंगे। कहा जा रहा है कि इस बार जन्माष्टमी की रात सबके लिए खास होने वाली है।


