Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान क्यों नाराज हो जाती हैं माता लक्ष्मी, पढ़ें अनोखी कहानी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Jagannath Rath Yatra Katha : जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा से जुड़ी एक खास कहानी भी है, जिसके बारे में शायद ही आप जानते हो। यह कहानी लक्ष्मी माता की नाराजगी से जुड़ी हुई है। जगन्नाथ भगवान और लक्ष्मी माता की ये कहानी हेरा पंचमी से संबंध रखती है।

Jagannath Rath Yatra Katha Why does Goddess Lakshmi get upset during the Jagannath Rath Yatra Read this unique story

Jagannath Rath Yatra Katha : जगन्नाथ भगवान की ऐतिहासिक एवं भव्य रथयात्रा 16 जुलाई को पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ निकाली जाएगी। कल से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर भ्रमण करेंगे। मंदिर समिति के अनुसार गुरुवार सुबह छह बजे पूजा-अर्चना के बाद मंदिर का पट खोला जाएगा। शाम चार बजे भगवान के विग्रहों को रथ पर विराजमान कर भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। भक्ति और श्रद्धा के साथ भक्तजन रथयात्रा में शामिल होते हैं और रथ भी खींचते हैं। जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा से जुड़ी एक खास कहानी भी है, जिसके बारे में शायद ही आप जानते हो। यह कहानी लक्ष्मी माता की नाराजगी से जुड़ी हुई है। जगन्नाथ भगवान और लक्ष्मी माता की ये कहानी हेरा पंचमी से संबंध रखती है। हेरा का अर्थ होता है ‘खोजना’ और पंचमी का अर्थ है 'पांचवां दिन'। पूरी में आज भी भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी की इस लीला को दर्शाया जाता है। इस लीला को हेरा गोहा के नाम से जाना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस प्रचलित कहानी के बारे में -

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान क्यों नाराज हो जाती हैं माता लक्ष्मी, पढ़ें अनोखी कहानी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान पांचवें दिन हेरा पंचमी मनाई जाती है। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हेरा पंचमी मनाई जाती है। इसी दिन धन की देवी लक्ष्मी जगन्नाथ भगवान के मिलने के लिए गुंडिचा मंदिर जाती हैं। गुंडिचा मंदिर जगन्नाथ भगवान की मौसी का घर माना जाता है। मान्यता है जब रथयात्रा के लिए अपने भाई भलराम और बहन सुभद्रा के साथ जगन्नाथ भगवान जाते हैं तो वो माता लक्ष्मी से ये वादा करते हैं कि वो जल्दी वापस लौट आएंगे। जब जगन्नाथ भगवान गुंडिचा मंदिर अपने मौसी के घर जाते हैं तो वहीं ठहर जाते हैं। ऐसे में लक्ष्मी माता नाराज हो जाती हैं। ऐसे में रथ यात्रा के पांचवें दिन पालकी में सवार होकर लक्ष्मी माता गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। वह अपनी शिकायत जगन्नाथ भगवान से करती हैं और वो उन्हें जल्दी वापस आने का वादा करते हैं। माता लक्ष्मी संतुष्ट नहीं होती हैं। नाराजगी में लक्ष्मी माता जगन्नाथ भगवान के रथ नंदिघोष को आंशिक रूप से तोड़ देती हैं। फिर जगन्नाथ भगवान माता लक्ष्मी को मनाते हैं। तभी से हेरा पंचमी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Shrishti Chaubey

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