जगन्नाथ रथ यात्रा में किनके लिए बनता है अधरपाना, मटके फोड़कर फेंकते है इसे, भूत प्रेतों से है संबंध
jagannath puri rath yatra 2026 secrets: जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का 16 जुलाई से शुरू होगी। इसके बाद 26 जुलाई को अधर पाना होगा। क्या है यह परंपरा और इसे क्यों किया जाता है?

jagannath puri rath yatra 2026 secret: जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों लोग आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो इस रथ यात्रा में शामिल होता है वो बैकुंठ धाम को जाता है। इस दौरान सभी देवता गण भी शामिल होते हैं और नकारात्मक शक्तियां जैसे भूत प्रेत आदि भी जो मुक्ति मार्ग चाहते हैं, इस रथयात्रा में शामिल होती हैं। ऐसे में प्रकृति के इस संतुलन के लिए रथ यात्रा में एक दिन अधर पाना होता है। अधर पाना का अर्थ है होंठ और पाना का अर्थ का पेय पदार्थ। इस दिन एक खास तरह का प्रसाद बनाया जाता है। इस साल 26 जुलाई को अधर पाना होगा। यह क्या और कैसे बना है और भगवान इसका भोग कैसे लगाते हैं, इसके बारे में जानें
किसके लिए होता है प्रसाद
आपको बता दें कि कहा जाता है कि इंसान की तरह अदृश्य शक्तियां, भूत प्रेत भी इस यात्रा में शामिल होने आते हैं, तो एक दिन उनके लिए खास तौर पर उनके लिए प्रसाद बनता है, जिसका जगन्नाथ जी को भोग लगाकर उनके लिए उसे जमीन पर फेंका जाता है, ऐसा माना जाता है कि इस प्रसाद को खाकर ये शक्तियां तृप्त होती हैं और मुक्ति पाती हैं। भगवान के इस एक दिन के दर्शन के लिए वे भी पूरे साल इंतजार करती हैं।
क्या है परंपरा अधर पाना की?
अधर पाना एक मीठा पेय पदार्थ होता है। इसको सफेद चीजों, पनीर, दूध, चीनी और मसालों से बनाया जाता है। बड़े -बड़े मटकों में इसे भरा जाता है। इसे आम लोग नहीं खा सकते हैं। ये प्रसाद को मटकों में भरकर रथ यात्रा के दौरान फोड़ दिए जाते हैं। इसके लिए तीन बड़े मटके होते हैं, इन्हें लाठिया कहा जाता है, इसमें पाना भरा जाता है और भगवान के होठों से छुआकर इसे जानूझकर रथ पर ही तोड़ दिया जाता है। इससे यह प्रसाद नीचे गिर जाता है और नकारात्मक शक्तियां जो जगन्नाथ के दर्शन के लिए आई हैं वो इस प्रसाद को ग्रहण करने से त़प्त होती हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा में किस दिन क्या?
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का 16 जुलाई से शुरू होगी। इसके बाद 20 जुलाई को हेरा पंचमी मनाई जाएगी और फिर 24 जुलाई को बहुदा यात्रा यानी वापसी यात्रा होगी। इसके बाद 25 जुलाई को सुना बेशा और 26 जुलाई को अधर पाना होगा, जिसके बारे में ऊपर बताया है। इसके बाद 27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे है।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
परिचय और अनुभव
अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।
शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर
अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
विजन
अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।
विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र
कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।
विशेषज्ञता
कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां


