Jagannath rath yatra: कब से शुरू हो रही जगन्नाथ रथ यात्रा? दर्शन मात्र से ही मिट जाते हैं सभी पाप
Jagannath rath yatra Start to End Date: जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने में निकाली जाती है। आमतौर पर यह जून या जुलाई महीने में शुरू होती है। जानें इस बार जगन्नाथ रथयात्रा कब से शुरू होगी।

Jagannath rath yatra start date 2026: ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली भव्य जगन्नाथ रथयात्रा भक्ति और आस्था का महा कुंभ है। 9 दिनों तक चलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा जिसे रथ त्योहार या श्री गुंडीचा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक निकलती है। यह पर्व भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को बहुत धूमधाम के साथ निकाली जाती है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की दिव्य मूर्तियों को अत्यंत विशाल और सुंदर रथ में विराजित किया जाता है। इसके बाद उन्हें नगर में घुमाया जाता है और गुंडीचा मंदिर तक लेकर जाया जाता है। गुंडीचा मंदिर को उनकी मौसी का घर माना जाता है। जानें जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व और इतिहास।
जगन्नाथ रथ यात्रा कब से शुरू होगी:
पंचांग के अनुसार, इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू होगी और 24 जुलाई 2026 को इसका समापन होगा। इस दिन बहुदा यानी वापसी यात्रा होगी।
जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व क्या है:
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दर्शन करने मात्र से पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव के साथ रथ को खींचता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। रथ यात्रा में जगन्नाथ धाम से निकलकर 3 किलोमीटर दूर गुंडीचा मंदिर तक जाते हैं। जहां भगवान जगन्नाथ सात दिन विश्राम करके एकादशी तिथि पर वापसी करते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास क्या है:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का जन्मदिन होता है। इस दिन प्रभु जगन्नाथ को उनके बड़े भाई प्रभु बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रत्न सिंहासन से उतार कर मंदिर के पास बने स्नान मंडप में ले जाया जाता है। इसके बाद उन्हें 108 कलशों से शाही स्नान कराया जाता है। मान्यता है कि इस स्नान से प्रभु बीमार हो जाते हैं और उन्हें ज्वार आ जाता है। इसके बाद 15 दिनों तक उन्हें एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जहां सिर्फ मंदिर के प्रमुख सेवकों और वैद्यों के अलावा ही जा सकते हैं। प्रभु जगन्नाथ के 15 दिन तक कोई भक्त दर्शन नहीं कर पाता है। इसके बाद आषाढ़ द्वितीया को छेरा पहरा की रस्म होती है, जिसमें पुरी के जगपति राजा सोने की झाड़ू से रथों के मंडप को साफ करते हैं। इसके बाद ही रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान


