Vastu: क्या नए घर में पुरानी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए?

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Vastu tips in hindi: आपको किन वास्तु नियमों के बारे में जानना चाहिए। आपको घर में किस पेड़ की लकड़ी लगवानी चाहिए और कितनी तरह की लकड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके बारे में भी आप जान सकते हैं। 

वास्तु-पुरानी लकड़ी का इस्तेमाल

वास्तु के अनुसार नया घर बनवा रहे हैं तो क्या दरवाजों और अलमारी के लिए पुरानी लकड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसा काफी लोग करते हैं, लेकिन इस बारे में वास्तु क्या कहता है। वास्तु के अनुसार इसको लेकर क्या नियम हैं और इसकेअलावा अगर नए घर को बना रहे हैं तो आपको किन वास्तु नियमों के बारे में जानना चाहिए। आपको घर में किस पेड़ की लकड़ी लगवानी चाहिए और कितनी तरह की लकड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके बारे में भी आप जान सकते हैं।

घर में कैसी लकड़ी लगवानी चाहिए?

नए मकान में कितनी तरह की लकड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए यह भी एक सवाल है। वास्तु के अनुसार घर में एक ही तरह की लकड़ी का इस्तेमाल हर काम में करना चाहिए। दो तरह की लकड़ी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, यह मध्यम है। तीन तरह की लकड़ी का इस्तेमाल अधम कहलाता है। घर में धन लाने के लिए शीशम, श्रीपर्णी तथा तिन्दुकी के काष्ठ को अकेले ही लगाना चाहिए। अन्य किसी काश्तके के साथ जुड़ने पर ये मंगलकारी नहीं होता। इस तरह घर में लकड़ी का इस्तेमाल करेंगे तो आपको लाभ होगा।

क्या पुराने घर की लकड़ी को नए घर में इस्तेमाल करना सही है?

वास्तु के अनुसार अक मकान में अगर किसी लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है तो नए मकान में उसी लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, वास्तु के अनुसार यह सही नहीं माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे संपत्ति का नाश होता है और आपके घर में अशांति रहती है।

यह भी कहा जाता है कि ऐसे घर में ग्रहस्वामी नहीं रह पाता है। इसलिए एक घर के दरवाजे को नए घर के दरवाजे की लकड़ी में इस्तेमाल ना करें। आप इसके लिए नई लकड़ी लाएं। वास्तु के अनुसार इसे सही नहीं माना जाता है।

घर में इन पौधों की लकड़ी को न लगाएं

ऐसे पौधे जिनके पत्तों से दूध निकलता हैं, ऐसे पौधे जिनके कांटे होते हैं। सर्प के वास , दीमक लगे हुए, समाधि-स्थल में लगे हुए , देवमंदिर में लगे हुए, आश्रम में लगे हुए, नदियों के संगम पर स्थित, श्मशान भूमि में लगे हुए, तालाब (तालाब आदि)-पर लगे आदि के पेड़ों की लकड़ी से घर नहीं बनवाना चाहिए। आप घर में अशोक, जापानी, साखू, असना, चंदन, देवदारु, शीशम, अर्जुन, शाल और शमी-इन वृक्षोंकी लकड़ी शुभ फल देती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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