6 या 7 अक्टूबर कब है इंदिरा एकादशी, जानें तिथि, मुहूर्त, विधि और महत्व
Indira Ekadashi 2026 date : इस साल की इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार के दिन रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा उपासना करने से मन मांगी इच्छा पूरी हो सकती है।

Indira Ekadashi 2026 date : इंदिरा एकादशी पर विशेष रूप से विष्णु भगवान की विधिवत पूजा उपासना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने और श्री हरि विष्णु का ध्यान करने से पापों का नाश हो जाता है। इस साल की इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार के दिन रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा उपासना करने से मन मांगी इच्छा पूरी हो सकती है। आइए जानते हैं इंदिरा एकादशी कब है, पूजा की विधि और महत्व -
6 या 7 अक्टूबर कब है इंदिरा एकादशी, जानें तिथि, मुहूर्त, विधि और महत्व
इंदिरा एकादशी व्रत में ध्यान रखें ये बात
इंदिरा एकादशी व्रत को रखने वाले व्यक्ति को आहार, बर्ताव, इंद्रियों और चित पर संयम रखना जरूरी माना जाता है।
इंदिरा एकादशी कब है?
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर की रात 02:47 मिनट हो रही है, जो 7 अक्टूबर की रात 12:47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के चलते उत्पन्ना एकादशी का व्रत मंगलवार, 6 अक्टूबर के दिन रखा जाएगा। इस दिन सुबह में सर्वार्थ सिद्धि योग 06:17 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा।
इंदिरा एकादशी की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ में उपासना करें। प्रभु का जलाभिषेक करें। फिर पीला चंदन, पीले फूल, पीला फल, तुलसी दल चढ़ाएं। व्रत करने का संकल्प लें। व्रत रखा है तो इंदिरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद घी के दीपक की विष्णु जी और लक्ष्मी जी की आरती करें। अब प्रभु को तुलसी पत्ती मिलाकर भोग लगाएं। शाम के समय फलाहार करें। वहीं, व्रत रखा हो या नहीं इंदिरा एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अंत में क्षमा प्रार्थना करें। अगले दिन प्रभु की पूजा करने के बाद व्रत का पारण करें।
इंदिरा एकादशी व्रत महत्व- इस पावन दिन व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल सकती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। यह व्रत संतान के लिए भी रखा जाता है। इस व्रत को करने से निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति भी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


