Indira Ekadashi Katha: इंदिरा एकादशी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, पढें इंदिरा एकादशी कथा
- Indira Ekadashi Katha: आज है इंदिरा एकादशी। इंदिरा एकादशी का व्रत बिना कथा का पाठ के अधूरा माना जाता है। व्रत रखा हो या न रखा हो, इंदिरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना या सुनना पुण्यदायक माना जाता है।

Indira Ekadashi Katha: आज शनिवार के दिन विष्णु भक्त इंदिरा एकादशी का व्रत रखेंगे। हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत कथा का पाठ किए बिना अधूरा माना जाता है। व्रत रखा हो या न रखा हो, इंदिरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना या सुनना फलदायी माना जाता है। पढें इंदिरा एकादशी व्रत की कथा-
इंदिरा एकादशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में महिष्मति नाम का एक नगर था। जिसका राजा इंद्रसेन था। इंद्रसेन एक बहुत ही प्रतापी राजा था। राजा अपनी प्रजा का पालन-पोषण अपनी संतान के समान करते था। राजा के राज में किसी को भी किसी चीज की कमी नहीं थी। राजा भगवान विष्णु का परम उपासक था। एक दिन अचानक नारद मुनि का राजा इंद्रसेन की सभा में आगमन हुआ। नारद मुनि राजा के पिता का संदेश लेकर पहुंचे थे। राजा के पिता ने कहा था कि पूर्व जन्म में किसी भूल के कारण वह यमलोक में ही हैं। यमलोक से मु्क्ति से के लिए उनके पुत्र को इंदिरा एकादशी का व्रत करना होगा, ताकि उन्हें मोक्ष मिल सके।
पिता का संदेश सुनकर राजा इंद्रसेन ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में बताने को कहा। तब नारद जी ने कहा कि यह एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। एकादशी तिथि से पूर्व दशमी को विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करने के बाद एकादशी को व्रत का संकल्प करें। नारद जी ने आगे बताया कि द्वादशी के दिन स्नान आदि के बाद भगवान की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद व्रत खोलें। नारद जी ने कहा कि इस तरह से व्रत रखने से तुम्हारे पिता को मोक्ष की प्राप्ति होगी और उन्हें श्रीहरि के चरणों में जगह मिलेगी। राजा इंद्रसेन ने नारद जी के बताए अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत किया। जिसके पुण्य से उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे बैकुंठ चले गए। इंदिरा एकादशी के पुण्य प्रभाव से राजा इंद्रसेन को भी मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति हुई।
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