रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न, जानें उपाय

Feb 22, 2026 04:42 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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रंगभरी एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा भी होती है। यह एक ऐसा एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु की नहीं बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना होती है।

रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न, जानें उपाय

हिंदू धर्म में रंगभरी एकादशी का खास महत्व होता है। रंगभरी एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा भी होती है। यह एक ऐसा एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु की नहीं बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव पहली बार माता पार्वती को गौना कराकर वाराणसी यानी काशी लेकर आए थे। इसी खुशी में काशी के लोग माता गौरा और भगवान शिव के साथ होली खेलते हैं। इसलिए इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में इस दिन से ही होली का आगाज हो जाता है। इसलिए इस दिन भक्त रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं। चलिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के कुछ उपाय जानते हैं।

इस साल रंगभरी एकादशी का पर्व 27 फरवरी को मनाई जा रही है। यह एकादशी भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक मानी जाती है। रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के 'ॐ नमः शिवाय', 'ॐ शं शिवाय नमः', 'सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते', 'ॐ गौरीशंकराय नमः' आदि का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करने से रंगभरी एकादशी के व्रत का सौ गुना फल प्राप्त होता है।

रंगभरी एकादशी पूजा विधि
- रंगभरी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- इसके बाद पूजा घर में घी का दीपक जलाकर हाथ जोड़कर भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद एक वेदी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती को पीले चंदन से तिलक करें और उन्हें पीले फूलों की माला पहनाएं।
- फिर पंजीरी, फल, पंचामृत, पंचमेवा, तुलसी पत्ते आदि का भोग अर्पित करें और भगवान शिव तथा माता पार्वती का ध्यान करें।
- इसके बाद आंवले वृक्ष की पूजा करें। वृक्ष के नीचे नवरत्न युक्त कलश स्थापित कर धूप-दीप जलाएं।
-,साथ ही रोली, चंदन, पुष्प, फल, अक्षत आदि अर्पित कर पूजा करें।
- यदि आसपास आंवला वृक्ष न हो तो आप प्रसाद के रूप में शिव-शक्कोति आंवला फल या बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।
- आखिर में आरती करें और अगले दिन व्रत पारण करें।

खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए उपाय
अगर आप वैवाहिक जीवन सुखमय चाहते हैं, तो रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को गुलाल अर्पण करना चाहिए। इससे जीवन में वैवाहिक कष्ट खत्म होते हैं। इसके अलावा रंगभरी एकादशी के दिन माता गौरी को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पण करनी चाहिए। इससे जीवन में मधुरता आती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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