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क्या है मन की समाप्ति का मतलब? सक्रियता थमने पर ही साधक बनता है योगी

क्या है मन की समाप्ति का मतलब? सक्रियता थमने पर ही साधक बनता है योगी

संक्षेप:

हमारा मन एक तरह का क्रिया कलाप है। जब इसकी सक्रियता धमने लगती है तभी साधक योगी बनने लायक होता है। तो चलिए जानते हैं कि मन की समाप्ति के बाद क्या-क्या होता है? 

Nov 25, 2025 10:10 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान, डॉ. प्रणव पण्ड्या
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इस संसार में सारा कुछ मन का जादू है। यह हटा कि समझो सारा भ्रम मिटा। मन सब कुछ को अपने में समेट लेता है- अहंकार, इच्छाएं, कामनाएं, कल्पनाएं, आशाएं, तत्त्वज्ञान और शास्त्र। जहां कुछ जो भी सोचा जा सकता है, सोचा जा रहा है, वह मन है। जो भी जाना गया है, जो भी जाना जा सकता है, जो भी जानने लायक समझा जाता है, वह सब-का-सब मन के दायरे में है। मन की समाप्ति का मतलब है- जो जाना है, उसकी समाप्ति और जो जानना है उसकी समाप्ति। यह तो छलांग है-ज्ञानातीत में। जब मन न रहा, तो जो बचा वह ज्ञानातीत है।

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मन के इसी सत्य को गोस्वामी तुलसीदासजी ने अपनी रामायण में गाया है- ‘गो गोचर जहां लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई॥’ अर्थात इंद्रियां, इंद्रियों की पहुंच और जहां-जहां तक मन जाता है, हे भाई, तुम उस सबको माया जानना, मिथ्या समझना। महर्षि पतंजलि के अनुसार इसी माया का मिटना, मिथ्या का हटना यानी कि मन का समाप्त होना योग है।

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मन की परेशानी, मन से परेशानी, साधकों का सबसे अहम् सवाल है, सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण प्रश्न है। इस उलझन को सुलझाने के लिए सबसे पहले यह जान लें कि आखिर मन अपने आप में है क्या? यह हमारे भीतर बैठा हुआ क्या कर रहा है, क्या-क्या कर रहा है? आमतौर पर सब यही सोचते रहते हैं कि मन सिर में पड़ी या रखी हुई कोई भौतिक चीज है। मन एक वृत्ति, क्रियाशीलता है। अब जैसे कि कोई चलता हुआ आदमी बैठ जाए, तो बैठने पर उसका चलना कहां भाग गया?

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तो बात इतनी-सी है कि चलना कोई वस्तु या पदार्थ तो था नहीं, वह तो एक क्रिया है, इसलिए कोई किसी के बैठने पर यह नहीं पूछा करता कि तुमने अपना चलना कहां छुपा कर रख दिया? यदि कोई किसी से ऐसा पूछने लगे, तो सामने वाला जोर से हंस पड़ेगा। वह यही कहेगा कि यह तो क्रिया है। मैं चाहूं, तो फिर से चल सकता हूं, बार-बार चल सकता हूं। चाहने पर चलना रोक भी सकता हूं। बस, कुछ इसी तरह मन भी एक तरह का क्रिया-कलाप है। यह सक्रियता थमे, तो मन का अवसान हो और साधक योगी बने।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh
गरिमा सिंह हिंदुस्तान लाइव में ज्योतिष सेक्शन में काम करती हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह एंटरटेनमेंट बीट पर भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से टेलीविजन और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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