भगवान एक बार में करोड़ों लोगों के मन की कैसे सुनते हैं? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि कण-कण में भगवान हैं, तब एक ही समय में करोड़ों-अरबों के मन की बात कैसे सुन और समझ लेते हैं। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया।

भगवान एक बार में करोड़ों लोगों के मन की कैसे सुनते हैं? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेमानंद महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। भक्त उनसे अपने मन की जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त करते हैं। प्रेमानंद महाराज जी से लोग तरह-तरह के प्रश्न पूछते हैं, जिनका वे बहुत ही सरल और सहज तरीके से उत्तर देते हैं।। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि कण-कण में भगवान हैं, तब एक ही समय में करोड़ों-अरबों के मन की बात कैसे सुन और समझ लेते हैं। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया।

'इन्द्रियाणां मनश्चास्मि'

इस सवाल का जवाब देते हुए महाराज जी कहते हैं कि इन्द्रियाणां मनश्चास्मि। वही मन बने हुए हैं। भगवान कह रहे हैं कि इंद्रियों में मन मैं हूं। तो आप कैसे कह सकते हो कि वो कैसे सुन लेते हैं। वो मन ही बने हैं। सबके मन वही बने हुए हैं। जैसे एक शीशा में देखो, तो हम अकेले और करोड़ो शीशा तोड़कर के मकान बना दो और उसमें तुम देखो, तो तुम ही दिखाई दोगे ना। तो अब करोड़ों दिखाई दे रहे हो, लेकिन हो तुम ही। ऐसे ही एक भगवान सच्चिदानंद।

हम प्राकृतिक बुद्धि वाले लोग हैं

महाराज जी कहते हैं कि ये करोड़ों शरीर दिखाई दे रहे हैं और वो सबके मन में बैठा हुआ है। सबकी सुन रहा है। हम लोग प्राकृतिक बुद्धि वाले हैं। हमारी प्राकृतिक शरण इंद्रिय है, तो 100 आवाज हम एक साथ नहीं सुन सकते हैं। लेकिन वो एक साथ एक अरब आवाज सुनकर एक अरब लोगों को उत्तर देते हैं इसलिए वो भगवान है, परमात्मा है। ऐसे में उनकी सामर्थ्य तो अनंत है। महाराज जी कहते हैं कि वो अंगुली से सुन सकते हैं। जबकि अंगुली में श्रवण इंद्री थोड़ी है। पर वो अंगुली से सुन सकते हैं।

भगवान सबकुछ हैं

महाराज जी कहते हैं कि वो कान से खा सकते हैं, वो पैर से सूंघ सकते हैं। सबकुछ सच्चिदानंद में सामर्थ होती है। अपने लोग यानी प्राकृतिक लोग सिर्फ कान से ही सुन सकते हैं और 100 आवाजें हो रही हों, तो हम पहचान नहीं सकते हैं कि कौन क्या बोल रहा है। लेकिन वो असंख्य लोग बोले एक साथ तो सबको उत्तर भगवान दे देंगे। भगवान, भगवान हैं। वही सबकी आत्मा बने हुए हैं, वही सबकी बुद्धि बनी हुए हैं। सही पूछो तो वही सबकुछ बने हुए हैं। उनके सिवाय कुछ है ही नहीं। तो अपनी बात अपने सुन लेते हैं ना, ऐसे ही भगवान सबकी बात सुन लेते हैं।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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