
2026 में केतु का सबसे अधिक प्रभाव किन राशियों पर होगा, केतु के बारे में क्या ये जानते हैं आप
साल 2026 में राहु-केतु का प्रभाव सभी राशि के लिए होगा। कुछ राशियों पर केतु का अधिक प्रभाव तो कुछ पर केतु का कम प्रभाव पड़ेगा। भगवान् विष्णु के चक्र से कटने पर सिर राहु कहलाया और धड़ केतु हुआ।
Ketu Gochar 2026: साल 2026 में राहु-केतु का प्रभाव सभी राशि के लिए होगा। कुछ राशियों पर केतु का अधिक प्रभाव तो कुछ पर केतु का कम प्रभाव पड़ेगा। भगवान् विष्णु के चक्र से कटने पर सिर राहु कहलाया और धड़ केतु हुआ। केतु राहु का ही कबन्ध है। राहु के साथ केतु भी ग्रह बन गया। नए साल की बात करें तो साल 2026 में केतु 29 मार्च 2026 को मघा नक्षत्र में गोचर करेंगें। इसके बाद 25 नवंबर, 2026 को अश्लेषा नक्षत्र में जाएंगे। फिर केतु 5 दिसंबर को कर्क राशि में एंट्री करेंगे। वहीं राहु 2 अगस्त 2026 को कुंभ राशि में रहकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 को राहु कुंभ से यात्रा को विराम देते हुए मकर में संचरण करेंगे। आइए जानें किन राशियों पर केतु का सबसे अधिक प्रभाव होगा।
साल 2026 में किन राशियों पर केतु का सबसे अधिक प्रभाव
मेष राशि वालों को साल 2026 में खास तौर पर सतर्क रहना होगा। इन लोगों को बिजनेस में नुकसान हो सकता है। आपका मेंटल स्ट्रेस भी बढ़ सकता है। लवलाइफ में भी किसी तरह की जल्दबाजी से बचें। इनकम के मामले में टेंशन नहीं है। वृषभ राशि वालों के समीकण बिगड़ा जाएंगे, आपको रिस्क वाले निवेश से दूर रहना है। लवलाइफ में परेशानी झेलनी होगी। कन्या राशि वालों को पिछले दिनों की समस्याएं आ घेरेंगी। लीगल मामल भी आपको परेशान कर सकता है। व्यवसाय से जुड़े लोगों को जोखिम भरे निवेश से बचना होगा। लवलाइफ में कोशिश करें कि लिमिटेड रहें। अधिक मेहनत करनी होगी। पैसों को सही से निवेशकरना आपकी प्राथमिकता होना चाहिए।
केतु के बारे में ये जानते हैं आप
केतु की दो भुजाएं हैं। वे अपने सिर पर मुकुट तथा शरीरपर काला वस्त्र धारण करते हैं। वे अपने एक हाथ में गदा और दूसरे में वरमुद्रा धारण किए हैं। ज्योतिषके अनुसार यह छाया ग्रह है। कुछ विद्वानोंके मतानुसार राहु की अपेक्षा केतु विशेष सौम्य व्यक्ति को परेशान नहीं करते हैं। अगर आपकी कुंडली में केतु खास हैं तो कुछ विशेष परिस्थितियों में यह व्यक्ति को यश के शिखरपर पहुंचा देता है। केतु की महादशा सात साल ती होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु अशुभ स्थानमें रहता है तो वह अनिष्टकारी हो जाता है। अनिष्टकारी केतुका प्रभाव व्यक्तिको रोगी बना देता है। इसकी प्रतिकूलता से दाद, खाज तथा कुष्ठ जैसे रोग होते हैं।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





