
गुरु वक्री होकर मिथुन राशि में करेंगे प्रवेश, जानें किन राशियों को मिलेगा लक और लाभ
गुरु इस साल अतिचारी चाल से चल रहे हैं। अब नवंबर में गुरु वक्री होने वाले हैं और मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में गुरु की जरा सी भी हलचल कई राशियों को प्रभावित करती है। फिलहाल गुरु कर्क राशि में चल रहे हैं। अब वक्री होते हुए ये मिथुन राशि में आएंगे।
गुरु इस साल अतिचारी चाल से चल रहे हैं। अब नवंबर में गुरु वक्री होने वाले हैं और मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में गुरु की जरा सी भी हलचल कई राशियों को प्रभावित करती है। फिलहाल गुरु कर्क राशि में चल रहे हैं। अब वक्री होते हुए ये मिथुन राशि में आएंगे। गुरु नवंबर को वक्री होंगे। इसका गोचर दिसंबर 2025 में 4 दिसंबर 2025 तक कर्क राशि में रहेगा और फिर 5 दिसंबर 2025 को गुरु वक्री होकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी केअनुसार कर्क राशि में ही बृहस्पति वक्री होकर दिसंबर में वक्र गति से मिथुन राशि में पुनः प्रवेश करेगा। 18 अक्टूबर से पूर्व भी बृहस्पति का गोचर मिथुन राशि में हो रहा था। पुनः मिथुन राशि में वक्री प्रवेश कर अपना व्यापक प्रभाव स्थापित करेगा। जिसका चराचर जगत सहित सभी राशियों पर व्यापक असर पड़ेगा। आइए जानें इसका किन राशिों पर प्रभाव होगा।

गुरु की इस चाल का किन राशियों पर असर होगा
मिथुन राशि वालों के लिए ऑफिस में, पैसों से जुड़े मामलों में पॉजिटिव रिजल्ट देगा। आपको पॉजिटिव रिजल्ट मिलेंगे। लाइफ पार्टनर से भी आपके रिश्ते अच्छे होंगे। बिजनेस और लवलाइफ में भी आपको अच्छे नतीजे मिलेंगे। वहीं कन्या राशि वालों को इस गोचर से लाभ के योग बन रहे हैं। आपकी लाइफ में सम्मान मिलने की स्थिति आएगी, इसके अलावा आप संपत्ति भी खरीदेंगे। वृश्चिक राशि वालों को गुरु का गोचर आर्थिक लाभ के साथ भाग्य से आपके सारे काम कराएगा। धर्मकर्म में आपकी रुचि बढ़ेगी। मीन राशि वालों को भी गुरु की कृपा से इनकम में वृद्धि के योग बन रहे हैं।
गुरु ग्रह को कुंडली में कैसे करें मजबूत
आपको बता दें कि गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। आपको बता दें कि कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं। मकर राशि गुरु नीच के होते हैं। अगर गुरु आपकी कुंडली में शुभ हैं तो बड़े भाई, शिक्षा, धन, संतान, ज्ञान का लाभ मिलता है। इन्हें भाग्य का कारक माना जाता है। अगर आपकी कुंडली में गुरु शुभ नहीं हैं तो आपकी लाइफ में विवाह, संतान भाग्य के लिए स्थितियां अच्छी नहीं रहेंगी। गुरु को अगर आपको खुश रखना है, तो इस दिन पीले कपड़े पहनें, पीला भोजन करें, पीली चीज दान करें। भगवान विष्णु को पीली चीज अर्पित करें। गुरुवार का व्रत रखें और ऊँ बृं बृहस्पते नम: का जाप रखें। महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता, इसलिए इस दिन कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





