Holika Dahan 2026: होलिका दहन की कितनी बार करें परिक्रमा? इन नियमों का रखें ध्यान, बढ़ेगी सुख-समृद्धि
होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। होलिका में कई पूजन सामग्रियों को भी अर्पित किया जाता है। इसके बाद होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन की अग्नि का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि होलिका अग्नि आसपास मौजूद बुरी और नकारात्मक शक्तियों को खत्म करता है।

रंगों की के पर्व की होली से पहले फाल्गुन की पूर्णिमा की रात होलिका दहन की परंपरा है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन कभी भी दिन में नहीं किया जाता है। वैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार 2 मार्च की रात होलिका दहन होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार शुभ काल में होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। होलिका में कई पूजन सामग्रियों को भी अर्पित किया जाता है। इसके बाद होलिका दहन किया जाता है।
होलिका दहन की परिक्रमा
होलिका दहन की अग्नि का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि होलिका अग्नि आसपास मौजूद बुरी और नकारात्मक शक्तियों को खत्म करता है। लेकिन इस अनुष्ठान से जुड़े कुछ नियम है, जिनका पालन करना जरूरी है, वरना पूजन का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इन्हीं नियमों में से एक है होलिका दहन की परिक्रमा। लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि होलिका दहन की परिक्रमा कितनी बार करना चाहिए। चलिए जानते होलिका दहन से जुड़े कुछ नियम जानते हैं।
होलिका दहन पूजा विधि
होलिका दहन के दिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पूजा की जाती है। पूजन के लिए सुबह जल्दी उठें और स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। दहन वाली जगह को गंगाजल से शुद्ध करें। पूजन सामग्री में रोली, अक्षत, गुलाल, फूल-माला, कच्चा सूत (कलावा), हल्दी, गेहूं की बालियां, जौ, चना, और गोबर के उपले एकत्रित कर लें।
परिक्रमा कितनी बार करें
होलिका दहन करने से पहले उसमें कलावा लपेटा जाता है। कलावा या कच्चा सूत लपेटते वक्त आप 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करें। मान्यता है कि इससे कई तरह के लाभ मिलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद को जलाने के लिए होलिका अग्नि में बैठी थी, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जल गई। इसलिए होलिका की अग्नि की बुराई की अंत और जीत का प्रतीक है। ऐसे में अगर आप परिक्रमा करते हैं, तो इससे आपके भीतर नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। बुराई का अंत होता है और जीवन खुशहाल बनता है।
होलिका दहन के नियम
होलिका दहन मं अक्षत, पुष्प और गुलाल अर्पित करें और अंत में नई फसल (गेहूं-जौ) को अग्नि में सेकें।होलिका दहन में कि रंग का कपड़ा पहनें ।
किस रंग के कपड़े पहनें
होलिका दहन बेहद पारंपरिक तरीके से किया जाता है। ऐसे में इस अनुष्ठान में कपड़ों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। होलिका दहन में पीले या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन चमड़े के वस्त्र या काले रंग के कपड़े नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। जबकि महिलाओं को इस दिन ज्यादा चमकीले और गहरे रंगों के कपड़ों से बचना चाहिए। साथ ही अपने बाल खुले नहीं छोड़ने चाहिए। पूजा के समय बाल खुले रखने से नकारात्मक शक्तियों का वास घर में हो सकता है।
तुरंत ना लौटें घर
ध्यान रखें कि होलिका जलाकर तुरंत घर ना लौटें। कुछ देर होलिका पर रुकें। उसकी अग्नि में जौ या अक्षत अर्पित करें। साथ ही भुने हुए अनाज को प्रसाद के रूप में बांटें।
राख का क्या करें
होलिका दहन की राख का भी खास महत्व होता है। लोग इससे जुड़े कई उपाय करते हैं। खासकर इस राख से वास्तु दोष दूर होता है। इसके लिए आप होलिका दहन के अगली सुबह उसकी राख को घर लाएं और उसे माथे पर लगाएं। साथ ही राख को घर के चारों कोनों में छिड़कें। इसे घर में मौजूद नकरात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
इस दिन होलिका माता की पूजा की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। होलिका दहन के दिन मांसाहारी भोजन वर्जित माना गया है। साथ ही मदिरा से भी दूर रहें।
किन्हें नहीं देखना चाहिए होलिका दहन मान्यता है कि जिन माता-पिता की केवल एक ही संतान होती है, उन्हें होलिका दहन देखने या उसकी पूजा करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि जिस जगह पर होलिका दहन होता है, वहां पर नकारात्मक शक्तियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में नवजात बच्चे को होलिका दहन वाली जगह पर न ले जाएं। इससे शिशु को ऊपरी बाधा हो सकती है। इसके अलावा सास बहू को एक साथ होलिका नहीं देखना चाहिए। शादी के बाद पहली बार आई बहु को भी होलिका दहन नहीं देखनी चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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