Holika Dahan 2026: होलिका दहन और पूजन की सही विधि क्या है? जानें क्या करें

Feb 25, 2026 05:18 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक होलिका दहन हमेशा रात में और शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है। दिन में होलिका जलाने की परंपरा नहीं है। होलिका दहन होने के बाद होलिका में कुछ वस्तुएं अर्पित की जाती है। चलिए जानते हैं कि होलिका दहन की पूजन विधि क्या है? 

Holika Dahan 2026: होलिका दहन और पूजन की सही विधि क्या है? जानें क्या करें

होलिका दहन का खास महत्व होता है। हर साल होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन किया जाता है। इसके अगले दिन रंगों का पर्व होली मनाया जाता है। होलिका दहन करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। परिवार के सभी सदस्यों को होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए। साथ हो होलिका की अग्नि में लोग कई शुभ चीजें अर्पित करते हैं। होलिका को शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। होलिका दहन और उसकी पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है। लेकिन बहुत से कम लोगों को होलिका दहन और पूजन विधि पता होती है। चलिए आज हम आपको होलिका दहन व पूजन विधि बताते हैं।

कब है होलिका दहन 2026
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक होलिका दहन हमेशा रात में और शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है। दिन में होलिका जलाने की परंपरा नहीं है। यही वजह है कि होलिका के लिए रात का समय ही शुभ माना गया है। इस बार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू हो रह इसलिए होलिका दहन भी 2 मार्च की रात में ही होगा। क्योंकि इस साल होलिका दहन पर भद्रा का प्रभाव भी है।

होलिका दहन की पूजा
होलिका दहन करने से पहले होलिका की पूजा की जाती है। इस पूजा को करते समय पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। होलिका पूजन सामग्री की बाद करें, तो इसमें एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा नई फसल के धान्यों जैसे पके चने की बालियां व गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती हैं।

दहन विधि
इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल और अन्य खिलौने रख दिए जाते हैं। होलिका दहन मुहूर्त समय में जल, मौली, फूल, गुलाल तथा ढाल व खिलौनों की चार मालाएं अलग से घर से लाकर सु‍‍रक्षित रख ली जाती हैं। इनमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमानजी के नाम की, तीसरी शीतलामाता के नाम की और चौथी अपने घर-परिवार के नाम की होती है।

होलिका दहन के दिन क्या करें?
- होलिका दहन के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें।
- व्रत का संकल्प लेने के बाद होलिका दहन की तैयारी करें। जिस जगह पर होलिका दहन करना हो, उस जगह को साफ कर लें।
- यहां होलिका दहन की सारी सामग्री इकट्ठा कर लें।
- फिर होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाकर भगवान नरसिंह की पूजा करें। शुभ मुहूर्त के दौरान होलिका की पूजा करें और उसमें अग्नि दें।
- इसके बाद परिवार के साथ होलिका की तीन बार परिक्रमा कर लें।
- फिर नरसिंह भगवान से प्रार्थना करते हुए होलिका की आग में गेहूं, चने की बालियां, जौ, गोबर के उपले आदि डालें।
- इसके बाद होलिका की आग में गुलाल और जल चढ़ाएं।
- होलिका दहन की ज्वाला देखने के बाद ही भोजन करें।
- होलिका दहन के दिन हनुमानजी की पूजा करने का महत्व बताया गया है। इससे साल भर शुभ परिणाम मिलते हैं।
- इस दिन पूरे परिवार के साथ चंद्रमा के दर्शन करने चाहिए। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

होलिका दहन के मंत्र
होलिका दहन के दौरान मंत्र जाप किया जाता है। मंत्र है-
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:,
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।

क्या अर्पित करें
होलिका दहन होने के बाद होलिका में कुछ वस्तुएं अर्पित की जाती है- इसमें- कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग है। सप्तधान्य हैं गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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