Holika Dahan 2026: होलिका दहन की रात क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
Holika Dahan 2026: होलिका दहन हमेशा रात में की जाती है, दिन में नहीं। इस बार होली का पर्व 2 मार्च की रात को होगा। होलिका दहन के साथ बुराइयों का विनाश होता है और सच्चाई की विजय होती है। मान्यता है कि इस रात कुछ चीजें बिल्कु करने की मनाही होती है और साथ ही कुछ काम शुभ भी माने जाते हैं।

होलिका दहन का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर माया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन की शाम लोग होला या होलिका माता की पूजा करते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में उसमें अग्नि प्रज्वलित की जाती है। होलिका दहन हमेशा रात में की जाती है, दिन में नहीं। इस बार होली का पर्व 2 मार्च की रात को होगा। होलिका दहन के साथ बुराइयों का विनाश होता है और सच्चाई की विजय होती है। मान्यता है कि इस रात कुछ चीजें बिल्कु करने की मनाही होती है और साथ ही कुछ काम शुभ भी माने जाते हैं। चलिए जानते हैं कि होलिका दहन पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
होलिका दहन के दिन क्या न करें
-होलिका माता की पूजा की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ऐसे में इस दिन मांस और मदिरा का सेवन वर्जित है।
इससे धन हानि और रोग हो सकते हैं। इस दिन तामसिक भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए।
-होलिका दहन के दिन पैसे उधार देने और लेने से बचना चाहिए, क्योंकि ज्योतिष के अनुसार, इससे धन हानि होती है।
-इस दिन पैसे का लेन-देन करने से बचना चाहिए।
- होलिका दहन के अवसर पर बुजुर्गों का अपमान करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे भगवान नाराज होते हैं और घर में रोग और दोष आ सकते हैं। इस दिन बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना अत्यंत फलदायी होता है।
- होलिका दहन की रात दूसरों के घर में भोजन करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इससे रोग-दोष आते हैं।
- होलिका दहन की रात पति-पत्नी को भी आपसी कलह से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पूरे साल लड़ाई और अशांति बनी रहती है।
रात में ना लाएं होलिका की राख
होलिका की राख का खास महत्व होता है। इससे लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। ऐसे में कई लोग होलिका दहन की अग्नि की राख रात में ले आते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।होलिका दहन की राख अगले दिन सुबह सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय लानी चाहिए। राख को अग्नि पूरी तरह शांत होने के बाद ही लेना शुभ है। यदि राख अभी भी गर्म हो तो ठंडी होने का इंतजार करें। सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर राख लाने जाएं।
महिलाएं ना करें ये काम
आमतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए अग्नि की परिक्रमा लेना वर्जित माना जाता है। नवविवाहित स्त्रियों को शादी के बाद पहली होली अपने मायके में ही मनानी चाहिए। अगर किसी कारणवश ससुराल में हो, तो होलिका की अग्नि देखना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि इससे मायके और ससुराल दोनों में दरिद्रता आ सकती है।
होलिका दहन पर नकारात्मक शक्तियां ज्यादा हावी रहती है। मान्यता है कि इससे बचने के लिए महिलाओं को अपने बाल खुले नहीं छोड़ने चाहिए। पूजा के समय बाल खुले रखने से नकारात्मक शक्तियों का वास घर में हो सकता है। होलिका दहन पर गर्भवती महिलाओं को होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।
होलिका दहन पर क्या करें
- होलिका की पूजा हमेशा शुभ मुहूर्त में करें और दहन के सम फल-फूल, जल, मोली, गुलाल और गुड़ आदि से होलिका का पूजन करना चाहिए।
- कच्चे सूत को होलिका के चारों और तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना चाहिए।
- फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित करना चाहिए।
- होलिका दहन की रात भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ा यह उपाय सबसे प्रमुख है।
होलिका दहन के समय विष्णु सहस्रनाम या नारायण कवच का पाठ करें।
- अगर मानसिक अशांति, चिंता या चंद्र दोष की वजह से परेशानी है, तो फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका की रात चंद्र देवता का दर्शन करें।
- इसके बाद मिश्री मिले हुए दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे चंद्र दोष से राहत मिलती है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
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