Holika Dahan 2026: कपूर, हरी इलायची... होलिका दहन की अग्नि में चढ़ाएं करें ये चीजें, खुशहाल रहेगा जीवन
Holika Dahan 2026: मान्यतानुसार, होलिका दहन की अग्नि जीवन के सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति दिलाती है। यही वजह है कि होलिका दहन की अग्नि से जुड़े लोग अलग-अलग उपाय करते हैं। चलिए जानते हैं कि होलिका दहन की अग्नि में कौन सी शुभ चीजें अर्पित करनी चाहिए।

रंगो का पर्व होली हर साल बेहद पारंपरिक और धूमधाम तरीके से मनाया जाता है। लेकिन इस पर्व के एक दिन होलिका दहन का कार्यक्रम संपन्न किया जाता है, जिसका खास महत्व होता है। हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि की रात्रि में होलिका दहन मनाया जाता है और अगले दिन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को रंगोत्सव मनाया जाता है। मान्यतानुसार, होलिका दहन की अग्नि जीवन के सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति दिलाती है। यही वजह है कि होलिका दहन की अग्नि से जुड़े लोग अलग-अलग उपाय करते हैं। लोग सुख और समृद्धि की कामना के लिए इस अग्नि में अलग-अलग चीजें अर्पित करते हैं। चलिए जानते हैं कि होलिका दहन की अग्नि में कौन सी शुभ चीजें अर्पित करनी चाहिए।
कब है होलिका दहन
होलिका दहन को लेकर इस साल लोगों के बीच कन्फ्यूजन है। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग और ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस साल होलिका पूजन और दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा। वहीं, रंगभरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। चलिए जानते हैं कि होलिका की अग्नि में क्या अर्पित करना चाहिए।
हवन सामग्री अर्पित करें
होलिका दहन की अग्नि में हवन की सामग्री अर्पित करना शुभ होता है। इस सामग्री को अर्पित करने के बाद अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करें। मान्यता है कि इस उपाय से शादी-विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। विवाह के योग भी बनते है। साथ ही वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
कपूर और हरी इलायची
होलिका दहन की अग्नि में कपूर और हरी इलायची चढ़ाना बेहद शुभफलदायी होता है। मान्यता है कि इन दोनों चीजों को अर्पित करने से बीमारी संबंधित समस्याएं दूर होती है।
गेहूं
होलिका दहन के दौरान गेहूं की नई फसल आने लगती है। ऐसे में होलिका की अग्नि में गेहूं अर्पित करने से अन्न की कमी नहीं रहती हैं। साथ ही जीवन खुशहाल होता है।
सूखा नारियल
होलिका दहन की अग्नि में सूखा नारियल चढ़ाना बेहद शुभ होता है। साथ ही अगर आप अग्नि में सूखे नारियल में चीनी और चावल भरकर अग्नि में अर्पित करते हैं, तो मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही इसे चढ़ाने से आर्थिक संकट भी खत्म हो जाता है।
अन्य सामग्री
होलिका की अग्नि में काला तिल, खीर-पूरी का पकवान, हल्दी, लौंग और पीली सरसों और भी अर्पित करना काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि काला तिल अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं। साथ ही शनि दोष और शत्रुओं से मुक्ति के लिए काले तिल होलिका दहन की अग्नि में डालें। जबकि हल्दी और पीली सरसों शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। इसके अलावा लौंग से वातावरण शुद्ध होता है और खीर-पूरी को समर्पण और प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है।
गोबर के उपले
होलिका दहन की अग्नि में गोबर के उपले डालना बेहद शुभ होता है। मान्यता है कि इसे डालने से घर में सुख-शांति आती है। लंबे समय से चल रही आर्थिक परेशानी से राहत मिल सकती है।
अन्य उपाय
मान्यता है कि होलिका की अग्नि में विशेष ऊर्जा होती है, जिससे नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं। होलिका दहन के बाद अगले दिन सुबह उसकी राख को घर लाकर माथे पर लगाना और घर के चारों कोनों में छिड़कना बहुत शुभ माना जाता है। इससे वास्तु दोष दूर होता है।
क्या ना करें अर्पित
होलिका दहन में हरे-पेड़ की टहनियां अर्पित ना करें।
प्लास्टिक, कूड़ा-करकट ना डालें।
चमड़े और लोहे की वस्तुएं भी ना डालें
पुराने और फटे कपड़े भी ना डालें।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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