होलिका दहन 2026: एक घंटा 12 मिनट का शुभ मुहूर्त, जानें सटीक समय और तिथि

Feb 27, 2026 08:58 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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होलिका दहन की तिथि को लेकर पहले से ही भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ पंचांगों में 2 मार्च तो कुछ में 3 मार्च की चर्चा हो रही है। होलिका दहन का पर्व पूर्णिमा तिथि में ही मनाया जाता है, इसलिए तिथि की शुरुआत महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इस दिन भद्रा का साया होने की वजह से भी कंफ्यूजन बना हुआ है

होलिका दहन 2026: एक घंटा 12 मिनट का शुभ मुहूर्त, जानें सटीक समय और तिथि

साल 2026 में होलिका दहन की तिथि को लेकर पहले से ही भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ पंचांगों में 2 मार्च तो कुछ में 3 मार्च की चर्चा हो रही है। होलिका दहन का पर्व पूर्णिमा तिथि में ही मनाया जाता है, इसलिए तिथि की शुरुआत महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इस दिन भद्रा का साया होने की वजह से भी कंफ्यूजन बना हुआ है कि होलिका दहन कब किया जाना चाहिए। इस कन्फ्यूजन की एक बड़ी वजह 3 मार्च को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भी है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से हो रही है। पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च को 05:07 बजे होगा।

होलिका दहन कब होगा?- पंडित नरेन्द्र उपाध्याय के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा।

भद्रा का साया क्यों अहम है?- पंडित नरेन्द्र उपाध्याय के अनुसार 2 मार्च की शाम से ही भद्रा का वास भी शुरू हो जाएगा। भद्रा काल 2 मार्च की शाम से लेकर 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। विशेष रूप से होलिका दहन जैसे पर्व में भद्रा का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। पौराणिक परंपराओं में भद्रा को अशुभ योग माना गया है। यही वजह है कि ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि होलिका दहन या तो भद्रा समाप्त होने के बाद किया जाए या फिर भद्रा पुच्छ काल में।

क्या है 2026 का शुभ मुहूर्त?- ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन के लिए रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच का समय अनुकूल माना गया है। यह अवधि कुल 1 घंटा 12 मिनट की है और इसे भद्रा पुच्छ काल माना जा रहा है। शास्त्रों में भद्रा पुच्छ काल में किए गए कार्यों को स्वीकार्य माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मुहूर्त में होलिका दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। हालांकि यह आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए स्थानीय परंपरा और विश्वसनीय पंचांग से भी समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

रंगों वाली होली कब?

इस वर्ष होली को लेकर भी लोगों में सवाल हैं। पंचांग के अनुसार:

2 मार्च 2026: होलिका दहन

3 मार्च 2026: चंद्र ग्रहण

4 मार्च 2026: रंगों वाली होली

चूंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ रहा है, इसलिए 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी।

होलिका दहन की पूजा कैसे करें?

  • होलिका दहन से पहले परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।
  • होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें।
  • कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित करें।
  • “ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।

परिवार की सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों के नाश की प्रार्थना करें।

अगले दिन होलिका की राख को तिलक के रूप में लगाना भी कई जगह शुभ माना जाता है।

क्या करें और क्या न करें?

क्या करें:

  • केवल तय शुभ मुहूर्त में ही दहन करें।
  • अग्नि के प्रति सम्मान रखें और सुरक्षा का ध्यान रखें।

क्या न करें:

  • भद्रा काल में होलिका दहन न करें।
  • अनावश्यक विवाद या अशांति से बचें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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