चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

Feb 22, 2026 11:40 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने-माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है।

चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

Holi 2026: इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने-माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं कि होलिका दहन कब होगा, सूतक कब लगेगा और रंग कब खेला जाएगा तो जानिए यहां सबकुछ।

2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन

वैदिक पंचांग के अनुसार, 2 मार्च 2026 (सोमवार) को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी, उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है, लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही ‘भद्रा’ का आगमन भी हो रहा है।

भद्रा का लंबा साया- 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर (सुबह 4:56 बजे) तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।

शुभ मुहूर्त का चयन- ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो, तो शास्त्रों में ‘भद्रा पुच्छ’ (भद्रा का पूंछ वाला भाग) में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार, इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा-

शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक

अवधि: 1 घंटा 12 मिनट

इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है।

3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च (मंगलवार) को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव (सूतक) भी पूरे देश में मान्य होगा।

ग्रहण की टाइमिंग- भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ‘ब्लड मून’ का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

सूतक काल और नियम- चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और खाना-पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में ‘होली का डंडा’ या रंग-गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है, इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।

4 मार्च: रंगों की होली (धुलेंडी) का असली उत्सव- 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन, यानी 4 मार्च 2026 (बुधवार) को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार, ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम-धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

होली 2026: पूरा कैलेंडर

2 मार्च (सोमवार): होलिका दहन – रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक

3 मार्च (मंगलवार): चंद्र ग्रहण – दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक

3 मार्च (मंगलवार): सूतक काल – सुबह 06:20 बजे से शुरू

4 मार्च (बुधवार): रंग वाली होली – सुबह से (धुलेंडी का असली दिन)

ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय

तुलसी का प्रयोग- सूतक लगने से पहले (3 मार्च सुबह) दूध, दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें।

गर्भवती महिलाएं- ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ (सुई, कैंची) का इस्तेमाल करें।

स्नान और दान- ग्रहण खत्म होने के बाद (3 मार्च शाम 7 बजे के बाद) स्नान करें और सफेद वस्त्र, चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है।

मंत्र जाप- ग्रहण के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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