Hindi Newsधर्म न्यूज़Holi 2026 par Chandra Grahan: Will Lunar Eclipse visible in india check Sutak timing
होली पर चंद्र ग्रहण का साया, जानें कब खेली जाएगी रंगों की होली? नोट करें सूतक काल और पूरी टाइमिंग

होली पर चंद्र ग्रहण का साया, जानें कब खेली जाएगी रंगों की होली? नोट करें सूतक काल और पूरी टाइमिंग

संक्षेप:

Chandra Grahan: साल 2026 में होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस बार होलिका दहन के दिन ग्रहण पड़ने की वजह से पूजा-पाठ और दहन के समय में थोड़ा बदलाव होगा। धार्मिक मान्यताओं में होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

Feb 09, 2026 12:04 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Chandra Grahan Lunar Eclipse 2026: साल 2026 में होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस बार होलिका दहन के दिन ग्रहण पड़ने की वजह से पूजा-पाठ और दहन के समय में थोड़ा बदलाव होगा। धार्मिक मान्यताओं में होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। रंगों का त्योहार लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और खुशी लाने वाला माना जाता है। इस बार होली के साथ ग्रहण पड़ने से यह दिन खास माना जा रहा है, क्योंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में साफ दिखाई देगा।

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कब लगेगा चंद्र ग्रहण और कितनी देर रहेगा?- इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा, जो फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होगा। भारतीय समयानुसार के हिसाब से ग्रहण दोपहर करीब 3:20 बजे से शुरू हुआ और शाम 6:47 बजे तक चला, यानी कुल मिलाकर लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक रहा। भारत में चंद्रमा के उदय के समय यानी शाम 6:26 बजे के आसपास ग्रहण का दृश्य शुरू होगा और ग्रहण का सबसे प्रमुख हिस्सा करीब 6:30 बजे तक रहेगा, जिसके बाद धीरे-धीरे ग्रहण समाप्त होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा, जो दिन की सुबह से ही शुरू हो जाएगा और ग्रहण खत्म होने तक माना जाएगा।

भारत में 20 मिनट तक दिखेगा चंद्र ग्रहण- यह ग्रहण शाम 6 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। यानी कुल मिलाकर करीब 20 मिनट का ग्रहण होगा।

सूतक काल कब से लगेगा?- चंद्र ग्रहण के चलते सूतक काल 3 मार्च की सुबह 9 बजकर 39 मिनट से शुरू हो जाएगा। सूतक के दौरान पूजा-पाठ, हवन या किसी नए शुभ काम की शुरुआत नहीं की जाती है। इस समय धार्मिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

किस तरह का चंद्र ग्रहण होगा?- होली के दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण आंशिक यानी खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा। यह भारत के साथ-साथ यूरोप, एशिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा।

होलिका दहन और होली की तारीख- फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी और 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर खत्म होगी। दृक पंचांग के अनुसार 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और 4 मार्च 2026 को रंगों की होली मनाई जाएगी।

ग्रहण के बाद होगा होलिका दहन- ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 6 बजकर 25 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक होलिका दहन का शुभ समय रहेगा।

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ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल से लेकर ग्रहण खत्म होने तक कुछ सावधानियां रखनी चाहिए। इस दौरान नए काम की शुरुआत न करें। यात्रा करने से बचें। गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के समय खाना न खाने की परंपरा है। इस दौरान मंत्र जप, ध्यान और ईश्वर का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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