Holi 2026:लड्डू गोपाल के साथ कैसे मनाएं होली, जानें शृंगार, भोग से जुड़े सभी नियम

Mar 04, 2026 09:27 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Holi 2026: होली के दिन श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष तौर पर पूजा अर्चना व सेवा की जाती है। साथ ही कई लोग लड्डू गोपाल के संग होली भी खेलते हैं। चलिए जानते हैं इस बार लड्डू गोपाल के साथ होली कैसे मनाएं। क्योंकि होली का पर्व श्रीकृष्ण और राधा से जुड़ा हुआ है।

Holi 2026:लड्डू गोपाल के साथ कैसे मनाएं होली, जानें शृंगार, भोग से जुड़े सभी नियम

देशभर में आज यानी 4 मार्च को होली का पर्व देशभर में बेहद ही धूमधाम से मनाया जा रहा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के साथ-साथ प्रेम का भी प्रतीक है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी से भी जुड़ा हुआ है। एक पौराणिक कथा के मुताबिक बचपन में भगवान श्री कृष्ण ने माता यशोदा से शिकायत की कि राधा इतनी गोरी है, फिर मैं क्यों काला हूं। बस फिर इसी का उत्तर देते हुए माता ने मजाक-मजाक में कह दिया कि तो जा राधा को भी अपने रंग में रंग दे। बस फिर क्या था श्री कृष्ण ने राधा रानी को गुलाल-अबीर और फूलों से रंग दिया। तब से होली पर रंग-गुलाल लगाने की परंपरा शुरू हुई। इसलिए होली के दिन श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष तौर पर पूजा अर्चना व सेवा की जाती है। साथ ही कई लोग लड्डू गोपाल के संग होली भी खेलते हैं। चलिए जानते हैं इस बार लड्डू गोपाल के साथ होली कैसे मनाएं।

लड्डू गोपाल के साथ करें होली की शुरुआत
अगर आप होली की शुरुआत करना चाहते हैं, तो सबसे पहले लड्डू गोपाल को रंग व अबीर लगाना चाहिए और उसके बाद ही त्योहार की शुरुआत करनी चाहिए। मान्यता है कि इससे परिवार पर श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है।

होली पर लड्डू गोपाल का शृंगार
लड्डू गोपाल का शृंगार करना बेहद शुभ माना जाता है। उनका शृंगार पूरे-विधि विधान से किया जाता है। कहते हैं कि होली भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय पर्व है और इस दिन उनके बाल स्वरूप का पूजन करने से सुख-समृद्धि व खुशहाली आती है। होली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद लड्डू गोपाल को स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं। होली के अवसर पर आप लड्डू गोपाल जी को रंग-बिरंगे कपड़े भी पहना सकते हैं। साथ ही उनके शृंगार में मुकुट, मोर पंख और बांसुरी भी जरूर अर्पित करें, क्योंकि इनके बिना कान्हा जी का शृंगार अधूरा रहता है।

लड्डू गोपाल के साथ कैसे खेलें होली
लड्डू गोपाल के साथ होली खेलने के लिए सबसे पहले होली की थाली तैयार करें और उसमें स्वस्तिक बनाएं। इस थाली में लड्डू गोपाल जी को विराजमान करें। सबसे पहले लड्डू गोपाल जी के चरणों में फूल समर्पित करें और इसके बाद उनके साथ फूलों की होली खेलें और उन पर फूल बरसाएं।

लड्डू गोपाल को कौन सा रंग लगाएं
होली के दिन अगर आप लड्डू गोपाल को पीले रंग का गुलाल लगाना शुभ होता है। मान्यता इसे लगाने से लड्डू गोपाल की साधक पर विशेष कृपा होती है क्योंकि यह उनका प्रिय रंग माना गया है। इसी के साथ लड्डू गोपाल जी को गुलाबी, हरा और लाल रंग का गुलाल भी लगाया जा सकता है। इसी के साथ अगर आप सुगंधित अबीर लगाते हैं, तो इससे लड्डू गोपाल जी प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।

होली पर लड्डू गोपाल के लिए भोग
होली के दिन लड्डू गोपाल को कुछ चीजों का भोग लगाना बेहद शुभ होता है। आपने घर पर गुजिया बनाई है तो ऐसे में आप घर पर लड्डू गोपाल को गुजिया का भोग भी लगा सकते हैं। हालांकि, कई कृष्ण मंदिरों में होली के पर्व पर गोपाल जी को चंद्रकला का भोग लगाया जाता है। तो ऐसे में आप इस दिन चंद्रकला या गुजिया दोनों में से किसी भी चीज का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा लड्डू गोपाल को मीठा दही या दही से बना कोई व्यंजन का भोग लगा सकते हैं। साथ ही जलेबी या मालपुआ भी भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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