Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू हो रहा है होलाष्टक, भूलकर भी न करें ये शुभ काम; जानें जरूरी नियम

Feb 23, 2026 12:07 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में होली से ठीक 8 दिन पहले का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे होलाष्टक कहते हैं। ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करना वर्जित होता है। यह ऐसा समय है जिसे शास्त्रों में बेहद 'संवेदनशील' और मांगलिक कार्यों के लिए 'अशुभ' माना गया है।

Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू हो रहा है होलाष्टक, भूलकर भी न करें ये शुभ काम; जानें जरूरी नियम

हिंदू धर्म में होली से ठीक 8 दिन पहले का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे होलाष्टक कहते हैं। ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करना वर्जित होता है। यह ऐसा समय है जिसे शास्त्रों में बेहद 'संवेदनशील' और मांगलिक कार्यों के लिए 'अशुभ' माना गया है। इसे हम 'होलाष्टक' के नाम से जानते हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है- 'होली' और 'अष्टक' यानी होली से ठीक 8 दिन पहले का वह कालखंड, जब प्रकृति और ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी होती है कि शुभ ऊर्जा का संचार धीमा पड़ जाता है। इस साल 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है, जो 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। इन 8 दिनों तक न तो शहनाइयां बजती हैं, न नए घरों में गृह-प्रवेश होता है और न ही किसी बड़े व्यापार की नींव रखी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खुशियों के त्योहार से ठीक पहले आखिर यह 'ब्रेक' क्यों लगता है? इसके पीछे न सिर्फ ज्योतिषीय कारण हैं, बल्कि भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की भक्ति और अग्नि-परीक्षा की वह करुण गाथा भी जुड़ी है, जो हमें अधर्म पर धर्म की जीत का अहसास कराती है। यहीं वह समय है जब ब्रह्मांड के आठ प्रमुख ग्रह अपना उग्र रूप दिखाते हैं, जिसके कारण मानवीय निर्णयों और भाग्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

होलाष्टक 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

होलाष्टक प्रारंभ: 24 फरवरी 2026, मंगलवार (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी)।

होलाष्टक समाप्त: 3 मार्च 2026, मंगलवार (होलिका दहन के साथ)।

धुलेंडी (रंगों की होली): 4 मार्च 2026।

क्यों अशुभ माना जाता है यह समय?- पौराणिक कथा के अनुसार, इन 8 दिनों में ही असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और विष्णु भक्त प्रह्लाद को भीषण यातनाएं दी थीं। अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए गए, इसलिए इन दिनों को कष्टकारी माना जाता है। अंत में होलिका दहन के दिन प्रह्लाद बच गए और बुराई का अंत हुआ। ज्योतिष के अनुसार, इन 8 दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे ग्रह उग्र स्वभाव में होते हैं, जिससे शुभ कार्यों का फल नहीं मिल पाता।

होलाष्टक में क्या न करें-

विवाह और सगाई: इस दौरान शादी-ब्याह या रोका जैसी रस्में बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

गृह प्रवेश: नए घर में शिफ्ट होना या गृह प्रवेश की पूजा करना वर्जित है।

नया व्यापार: नई दुकान खोलना या किसी बड़े बिजनेस डील पर साइन करना टाल दें।

संपत्ति और वाहन: नया मकान, जमीन या गाड़ी खरीदना इस समय शुभ नहीं माना जाता।

मुंडन और नामकरण: बच्चों के 16 संस्कारों में से कोई भी संस्कार (जैसे मुंडन या नामकरण) इन दिनों नहीं किया जाता।

इन दिनों क्या करना रहेगा शुभ-

शुभ कार्य भले ही बंद हों, लेकिन यह समय भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े या पैसे दान करने से कई गुना फल मिलता है।

मंत्र जाप: भगवान विष्णु और महादेव की उपासना करें। 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप मानसिक शांति देता है।

साफ-सफाई: होली की तैयारी के लिए घर की सफाई करें और नकारात्मकता दूर करने के लिए गंगाजल छिड़कें।

विशेष नोट: इस साल 3 मार्च 2026 को होलिका दहन की रात चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, इसलिए उस दिन सूतक काल के नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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