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हिंदू धर्म: विवाह में 7 फेरे ही क्यों जरूरी है? जानिए इसका महत्व

हिंदू धर्म: विवाह में 7 फेरे ही क्यों जरूरी है? जानिए इसका महत्व

संक्षेप:

अग्नि के साक्षी में वर-वधू 7 फेरे लेते हैं और जीवन भर साथ निभाने के 7 वचन देते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सप्तपदी के बिना विवाह अधूरा रहता है। 7 फेरे इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि ये संख्या सात्विक और पूर्णता का प्रतीक है।

Jan 03, 2026 04:29 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू विवाह को संस्कारों में सबसे पवित्र माना जाता है। इसमें सप्तपदी यानी 7 फेरे सबसे महत्वपूर्ण रस्म है। अग्नि के साक्षी में वर-वधू 7 फेरे लेते हैं और जीवन भर साथ निभाने के 7 वचन देते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सप्तपदी के बिना विवाह अधूरा रहता है। 7 फेरे इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि ये संख्या सात्विक और पूर्णता का प्रतीक है। सात ग्रह, सात रंग, सात स्वर और सात लोक, सबमें 7 का महत्व है। सप्तपदी से वर-वधू एक-दूसरे के जीवनसाथी बनते हैं और वैवाहिक जीवन की नींव मजबूत होती है। आइए विस्तार से समझते हैं इसका महत्व।

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सप्तपदी की विधि और प्रक्रिया

सप्तपदी में दूल्हा-दुल्हन अग्नि के चारों ओर 7 चक्कर लगाते हैं। पहला फेरा दुल्हन आगे रहकर लेती है, बाकी 6 फेरे दूल्हा आगे रहकर लेता है। प्रत्येक फेरे के साथ पंडित जी वैदिक मंत्र पढ़ते हैं और वर-वधू एक-एक वचन लेते हैं। फेरे लेते समय दुल्हन के दाहिने पैर से 7 मांगलिक पदार्थ (सुपारी, हल्दी आदि) आगे बढ़ाए जाते हैं। अंतिम फेरे के बाद दूल्हा दुल्हन के माथे पर सिंदूर लगाता है और विवाह पूर्ण होता है। यह रस्म अग्नि साक्षी में होती है, जो शुद्धता और सत्य का प्रतीक है।

सात फेरों के सात वचन और उनका अर्थ

हर फेरे में एक वचन लिया जाता है:

पहला फेरा – धर्म और भोजन की व्यवस्था का वचन।

दूसरा फेरा – परिवार की रक्षा और बल का वचन।

तीसरा फेरा – धन-समृद्धि और संग्रह का वचन।

चौथा फेरा – सुख-शांति और प्रेम का वचन।

पांचवां फेरा – संतान सुख और पशुधन का वचन।

छठा फेरा – साथ निभाने और स्वास्थ्य का वचन।

सातवां फेरा – जीवन भर साथ और विश्वास का वचन।

ये 7 वचन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर साथ चलने का संकल्प हैं। इन वचनों से वैवाहिक जीवन की नींव मजबूत होती है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों में सप्तपदी को विवाह की वैधता का प्रमाण माना गया है। ऋग्वेद और अन्य ग्रंथों में 7 फेरों का उल्लेख है। 7 संख्या पूर्णता और सात्विकता का प्रतीक है। सात फेरे सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा हैं। अग्नि साक्षी बनकर इन वचनों को अमर बनाती है। सप्तपदी से वर-वधू एक-दूसरे के पूरक बनते हैं और आत्मिक बंधन जुड़ता है। यह रस्म वैवाहिक जीवन को धार्मिक और आध्यात्मिक बनाती है।

सामाजिक और भावनात्मक महत्व

सप्तपदी भावनात्मक रूप से बहुत गहरा है। 7 फेरे लेते समय वर-वधू एक-दूसरे को जीवन भर का साथी स्वीकार करते हैं। यह रस्म परिवार और समाज के सामने प्रतिबद्धता दिखाती है। इससे रिश्ते में विश्वास, सम्मान और प्रेम बढ़ता है। आज भी सप्तपदी हर हिंदू शादी का केंद्र है। यह रस्म दंपति को सुख-दुख में साथ रहने की प्रेरणा देती है।

सप्तपदी हिंदू विवाह की आत्मा है। 7 फेरे जीवन के 7 पहलुओं को जोड़ते हैं और वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाते हैं। इस रस्म को श्रद्धा से निभाएं तो दंपति का जीवन सदा खुशहाल रहता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur
नवनीत राठौर को मीडिया के अलग-अलग संस्थानों में काम करने का 6 साल से ज्यादा का अनुभव है। इन्हें डिजिटल के साथ ही टीवी मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है। नवनीत फीचर लेखन के तौर पर कई सालों से काम कर रहे हैं और हेल्थ से जुड़ी खबरों को लिखने-पढ़ने का शौक है। और पढ़ें
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