शादी-विवाह से लेकर अन्य शुभ अवसरों पर शगुन के लिफाफे में 1 रुपया क्यों जोड़ा जाता है?

Feb 24, 2026 05:44 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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शगुन में 1 रुपया जोड़ना एक साधारण सी बात लगती है, लेकिन इसके पीछे बहुत गहरी सोच और ऊर्जा का नियम छिपा है। आइए जानते हैं कि यह परंपरा क्यों और कैसे इतनी महत्वपूर्ण है।

शादी-विवाह से लेकर अन्य शुभ अवसरों पर शगुन के लिफाफे में 1 रुपया क्यों जोड़ा जाता है?

हिंदू परंपरा में शादी, पूजा-पाठ, गुरु दक्षिणा या किसी भी शुभ कार्य में शगुन के लिफाफे में 100 की बजाय 101 रुपये, 500 की बजाय 501 रुपये या 1000 की बजाय 1001 रुपये देने की प्रथा बहुत पुरानी है। यह मात्र एक रुपये का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरी मानसिक और आध्यात्मिक सोच का हिस्सा है। इस छोटी सी राशि से शुभता का भाव बढ़ता है और जीवन में निरंतरता तथा प्रगति का संदेश जाता है। आइए जानते हैं कि यह परंपरा क्यों और कैसे इतनी महत्वपूर्ण है।

शगुन में 1 रुपया जोड़ने का पुराना महत्व

प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि-महर्षि संख्याओं के रहस्य को अच्छी तरह समझते थे। पूरी राशि जैसे 100, 500 या 1000 को शून्य के साथ खत्म होना निष्क्रियता का प्रतीक माना जाता है। जब हम इसमें 1 रुपया जोड़ते हैं, तो वह संख्या सक्रिय और गतिमान हो जाती है। यह संकेत देता है कि संबंध, प्रेम, धन और शुभ कार्य रुकें नहीं, बल्कि निरंतर आगे बढ़ते रहें। शगुन देने वाला और लेने वाला दोनों ही इस छोटे से 1 रुपये से सकारात्मक ऊर्जा महसूस करते हैं। इससे दोनों के बीच का बंधन मजबूत होता है और भविष्य में भी संबंध अच्छे बने रहते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें 1 का महत्व

कंप्यूटर की पूरी भाषा सिर्फ 0 और 1 पर टिकी है। 0 का मतलब है रुकना या बंद होना, जबकि 1 का मतलब है चलना या शुरू होना। जब हम शगुन में 1 रुपया जोड़ते हैं, तो यह ब्रह्मांड के उसी नियम को दर्शाता है कि कार्य रुके नहीं, बल्कि लगातार चलता रहे। शून्य वाली राशि (जैसे 100, 500) में स्थिरता है, लेकिन उसमें 1 जोड़ने से गति और प्रगति का भाव आ जाता है। यही कारण है कि शुभ कार्यों में 1 रुपया अतिरिक्त देने से मानसिक रूप से यह विश्वास बनता है कि सब कुछ अच्छा और निरंतर चलता रहेगा।

लाल किताब और विषम संख्या का संबंध

लाल किताब में भी इस सिद्धांत को बहुत महत्व दिया गया है। लाल किताब कहती है कि कोई भी उपाय कम से कम विषम संख्या (1, 3, 5, 7, 11, 21 आदि) के दिनों में लगातार करना चाहिए। विषम संख्या में 1 का प्रभाव होता है, जो कार्य को गतिमान और फलदायी बनाता है। सम संख्या (2, 4, 6, 8 आदि) में स्थिरता होती है, लेकिन उसमें प्रगति का भाव कम रहता है। इसलिए शगुन में 1 रुपया जोड़कर देने से वह राशि विषम हो जाती है और उसके पीछे छिपी ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। इससे देने वाले और लेने वाले दोनों को लंबे समय तक शुभ फल मिलता है।

परंपरा का महत्व

आज भी शादी, जन्मदिन, पूजा, गुरु दक्षिणा या किसी भी शुभ मौके पर लोग 1 रुपया अतिरिक्त जोड़कर शगुन देते हैं। यह छोटी सी परंपरा सिर्फ रिवाज नहीं है, बल्कि एक सकारात्मक संदेश है कि जीवन रुके नहीं, आगे बढ़ता रहे। जब हम 1 रुपया जोड़ते हैं, तो मन में यह भाव आता है कि संबंध, प्रेम और धन निरंतर बढ़ते रहें। यह छोटा सा 1 रुपया देने और लेने वाले दोनों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का पुल बनाता है। इसीलिए यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है।

शगुन में 1 रुपया जोड़ना एक साधारण सी बात लगती है, लेकिन इसके पीछे बहुत गहरी सोच और ऊर्जा का नियम छिपा है। अगली बार जब आप शगुन दें तो इस छोटे से 1 रुपये को याद रखें, यह सिर्फ एक रुपया नहीं, बल्कि प्रगति और सुख की कामना है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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