घर में जन्म या मृत्यु के बाद पूजा कब तक रहती है बंद? जानें सूतक-पातक के नियम

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Sutak Patak Rules in Hinduism: जन्म या मृत्यु के बाद घर में सूतक-पातक कब तक रहता है? पूजा-पाठ कब शुरू करें, क्या न करें और शुद्धिकरण कैसे करें। धर्म पुराणों के अनुसार पूरे नियम जानें।

sutak patak rules
सूतक-पातक के नियम

हिंदू धर्म शास्त्रों में सूतक और पातक को विशेष महत्व दिया गया है। घर में बच्चे का जन्म होने या किसी सदस्य की मृत्यु होने पर एक निश्चित अवधि तक पूजा-पाठ और शुभ कार्य बंद रहते हैं। इस समय को अशुभ माना जाता है। शुद्धिकरण के बाद ही परिवार सामान्य पूजा फिर से शुरू कर सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं इन नियमों को।

सूतक क्या होता है?

जब घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो सूतक काल लग जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। सूतक की अवधि आमतौर पर दस से बारह दिन तक मानी जाती है। इस समय घर में अशुद्धि का भाव रहता है। अवधि पूरी होने के बाद नामकरण संस्कार कराया जाता है और गंगाजल छिड़ककर घर का शुद्धिकरण किया जाता है। शुद्धिकरण के बाद ही पूजा फिर से शुरू की जा सकती है।

पातक क्या होता है?

परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर जो अशुद्धि लगती है, उसे पातक या मृत्यु सूतक कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसकी अवधि मृत्यु के दिन से तेरह दिनों तक मानी जाती है। तेरहवें दिन मृतक की आत्मा की शांति के लिए हवन और ब्राह्मण भोज करवाया जाता है। इसके बाद घर शुद्ध माना जाता है। पातक काल में भी पूजा और शुभ कार्यों पर रोक रहती है, ताकि परिवार शोक और शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी कर सके।

पूजा कब शुरू करें?

सूतक काल दस से बारह दिन और पातक तेरह दिन का होता है। इन अवधियों के दौरान पूजा बंद रखी जाती है। जब हवन हो जाए और घर का शुद्धिकरण गंगाजल तथा अन्य विधियों से पूरा कर लिया जाए, तभी पूजा-पाठ फिर से शुरू करना चाहिए। शुद्धिकरण के बाद मंदिर के पट खोले जा सकते हैं और सामान्य धार्मिक गतिविधियां फिर से शुरू की जा सकती हैं। जल्दबाजी में पूजा शुरू करने से बचें।

कहीं कमजोर तो नहीं आपका शनि? ये संकेत दिखें तो हो जाएं सावधान

सूतक-पातक के मुख्य नियम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। गरुड़ पुराण में भी इनका उल्लेख मिलता है। नियमों का पालन नहीं करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात कही गई है। परिवार के सदस्यों को इस दौरान संयम रखना चाहिए और अशुभ माने गए कार्यों से दूर रहना चाहिए। यह समय शांति और शुद्धिकरण का होता है, इसलिए बाहरी उत्सवों से दूरी बनाए रखना उचित रहता है।

घर के मेन गेट पर सिंदूर से क्यों लिखना चाहिए 'श्री '? वास्तु के अनुसार जानिए इसके महत्व और फायदे

भूलकर भी ना करें ये काम

सूतक और पातक के समय भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। पूजा-पाठ ना करें और दीप-अगरबत्ती ना जलाएं। इस समय मंदिर के पट बंद रखने की सलाह दी जाती है। किसी भी शुभ कार्य या उत्सव में हिस्सा ना लें। तुलसी के पौधे को भी नहीं छूना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से शास्त्रों के अनुसार, अशुद्धि का प्रभाव कम रहता है और शुद्धिकरण सही तरीके से पूरा होता है।

घर या ऑफिस में रखें फेंगशुई की ये खास मूर्ति, नौकरी-कारोबार में मिलेगी तरक्की और दूर होगी आर्थिक तंगी

क्या-क्या कर सकते हैं?

इस अवधि में मन ही मन अपने इष्ट देव का ध्यान किया जा सकता है। मन में मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है। किसी जरूरी काम से पहले स्नान अवश्य करें। सुबह उठकर सूर्य देव की ओर मुख करके प्रणाम कर सकते हैं। पातक के दौरान मृतक की आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए। ये कार्य शास्त्र सम्मत माने जाते हैं और मन को शांति देते हैं। शुद्धिकरण के बाद सामान्य पूजा फिर से शुरू हो जाती है।

सूतक और पातक के नियमों का सही पालन करने से घर शुद्ध होता है और पूजा फिर से शुरू की जा सकती है। शास्त्रों के अनुसार, चलने से परिवार में शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़घर में जन्म या मृत्यु के बाद पूजा कब तक रहती है बंद? जानें सूतक-पातक के नियम