Hindi Newsधर्म न्यूज़hindu dharm 5 work that son should not do while father alive
हिंदू धर्म: पिता जीवित हैं, तो पुत्र को ये काम करना है सख्त वर्जित, जानिए धार्मिक नियम

हिंदू धर्म: पिता जीवित हैं, तो पुत्र को ये काम करना है सख्त वर्जित, जानिए धार्मिक नियम

संक्षेप:

शास्त्रों और परंपराओं में कुछ कार्य ऐसे हैं, जो पिता के जीवनकाल में पुत्र के लिए सख्त वर्जित माने जाते हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने से ना केवल पारिवारिक व्यवस्था बिगड़ती है, बल्कि पितरों और देवताओं की नाराजगी भी हो सकती है।

Jan 21, 2026 02:23 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

हिंदू धर्म में पिता को परिवार का मुखिया, गुरु और देवता के समान माना गया है। पिता के रहते पुत्र का कर्तव्य है कि वह पिता के सम्मान और अधिकारों का पूर्ण रूप से पालन करे। शास्त्रों और परंपराओं में कुछ कार्य ऐसे हैं, जो पिता के जीवनकाल में पुत्र के लिए सख्त वर्जित माने जाते हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने से ना केवल पारिवारिक व्यवस्था बिगड़ती है, बल्कि पितरों और देवताओं की नाराजगी भी हो सकती है। आइए जानते हैं उन प्रमुख कार्यों के बारे में, जो पिता के जीवित रहते हुए पुत्र को कभी नहीं करने चाहिए।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

तर्पण और पिंडदान स्वयं ना करें

पिता के जीवनकाल में पुत्र को पूर्वजों का तर्पण या पिंडदान स्वयं नहीं करना चाहिए। यह कार्य पिता का पहला अधिकार है। अगर पुत्र यह कर्म कर लेता है, तो यह परंपरा और पितृ ऋण के नियमों का उल्लंघन माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि पिता के रहते पुत्र द्वारा तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती और परिवार में अशांति बढ़ सकती है। पितृकर्म में अनुशासन बनाए रखना परिवार की शांति और सम्मान के लिए आवश्यक है। पिता के निधन के बाद ही पुत्र को यह अधिकार प्राप्त होता है।

पिता का स्थान ना लें

घर के मुखिया के रूप में यज्ञ, पूजा, हवन या किसी भी धार्मिक कार्य का नेतृत्व पिता ही करते हैं। पिता के रहते पुत्र को इन कर्मों में मुख्य भूमिका नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से गलत है और पारिवारिक व्यवस्था में अव्यवस्था पैदा कर सकता है। पिता के सामने पुत्र को हमेशा सहायक की भूमिका में रहना चाहिए। यह नियम पिता के सम्मान और परिवार में अनुशासन बनाए रखने के लिए है।

मूंछ नहीं कटवानी चाहिए

हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार, पुत्र अपने जीवनकाल में केवल पिता के निधन के बाद ही मूंछ कटवाता था। मूंछ पिता और पुत्र के बीच सम्मान और परिपक्वता का प्रतीक मानी जाती थी। पिता के रहते पुत्र को अपनी मूंछ कटवाने से बचना चाहिए। यह नियम आज भी कई परिवारों में देखा जाता है और इसे पिता के प्रति आदर का प्रतीक माना जाता है। मूंछ कटवाना पिता के सामने पुत्र की अपरिपक्वता का संकेत नहीं देना चाहिए।

दान में अपना नाम ना लिखवाएं

पिता के रहते अगर पुत्र कोई दान या पुण्य कार्य करता है, तो उसे पिता के नाम पर करना चाहिए। स्वयं के नाम पर दान करना उचित नहीं माना जाता। यह नियम परिवार में पिता के प्रति आदर और सामाजिक सम्मान बनाए रखने के लिए है। पिता के नाम पर दान करने से पुत्र को पुण्य मिलता है और पिता का आशीर्वाद बना रहता है। अपना नाम आगे रखने से पितृ ऋण में कमी नहीं आती और पारिवारिक सम्मान प्रभावित हो सकता है।

कार्यक्रम में अपना नाम आगे ना लिखें

किसी भी अवसर, कार्यक्रम, निमंत्रण पत्र या शुभ कार्य में पिता के रहते पुत्र का नाम पहले नहीं लिखा जाना चाहिए। सबसे पहले पिता का नाम आना चाहिए और उसके बाद पुत्र का। यह नियम परिवार में सामंजस्य, पिता के प्रति सम्मान और परंपरा के पालन के लिए है। नाम की व्यवस्था से वैवाहिक या पारिवारिक कार्यों में सुख-शांति बनी रहती है। पिता के नाम को आगे रखना उनके अधिकार और सम्मान का प्रतीक है।

हिंदू धर्म में पिता को जीवित देवता माना जाता है। पिता के रहते इन नियमों का पालन करना पुत्र का सबसे बड़ा धर्म है। इन नियमों का सम्मान करने से परिवार में शांति, सम्मान और पितृ कृपा बनी रहती है। पिता के जीवनकाल में उनका स्थान कभी ना लें, इससे पुत्र का जीवन भी सुखमय और समृद्धिशाली बनेगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ , Aaj ka Rashifal,Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!