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हिंदू कैलेंडर का अंतिम माह कल से, इन बातों का रखें ध्यान, ना करें गलतियां

हिंदू कैलेंडर का अंतिम माह कल से, इन बातों का रखें ध्यान, ना करें गलतियां

संक्षेप:

फाल्गुन मास भगवान शिव और श्रीकृष्ण को समर्पित होता है, जिसमें महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। शास्त्रों में इसे जप, तप, दान और संयम का सर्वोत्तम समय माना गया है।

Feb 01, 2026 04:39 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास हिंदू वर्ष का अंतिम महीना होता है, जो 2 फरवरी 2026 से शुरू हो रहा है। यह महीना ऋतु परिवर्तन, वसंत का आगमन और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। फाल्गुन मास भगवान शिव और श्रीकृष्ण को समर्पित होता है, जिसमें महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। शास्त्रों में इसे जप, तप, दान और संयम का सर्वोत्तम समय माना गया है। इस महीने में सात्विक जीवनशैली अपनाने से विशेष पुण्य मिलता है, लेकिन कुछ कार्यों से बचना भी उतना ही जरूरी है। आइए जानते हैं फाल्गुन माह में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

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फाल्गुन माह का महत्व और विशेषता

फाल्गुन मास हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना है, जो ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है। इस महीने प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है और आध्यात्मिक रूप से आत्मशुद्धि का समय आता है। भगवान शिव की भक्ति और श्रीकृष्ण की आराधना के लिए यह महीना अत्यंत शुभ माना जाता है। महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) और होली (फाल्गुन पूर्णिमा) जैसे पर्व इस महीने आते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि फाल्गुन में दान, जप और सात्विक आचरण से ग्रह दोष दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह महीना पुरानी गलतियों से मुक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक है।

फाल्गुन माह में भूलकर भी ना करें ये काम

फाल्गुन मास में कुछ कार्यों से बचना आवश्यक है, क्योंकि ये पुण्य को कम कर सकते हैं और नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

होलाष्टक में मांगलिक कार्य - होली से पहले होलाष्टक लगते हैं, जिन्हें शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, जनेऊ आदि संस्कार नहीं करने चाहिए। होलाष्टक में किए गए शुभ कार्यों में बाधा आ सकती है।

तामसिक भोजन का सेवन - मांस, मदिरा, अंडा, प्याज, लहसुन और तामसिक आहार से पूरी तरह परहेज करें। यह महीना मन और शरीर की शुद्धि का है। तामसिक भोजन से मानसिक अशांति और नकारात्मकता बढ़ सकती है।

क्रोध, ईर्ष्या और अहंकार - फाल्गुन में क्रोध, घमंड और ईर्ष्या से दूर रहें। ये भावनाएं साधना में बाधा डालती हैं और पुण्य को कम करती हैं। संयम और विनम्रता अपनाएं।

फाल्गुन माह में जरूर करें ये शुभ कार्य

फाल्गुन मास में सकारात्मक कार्यों से विशेष फल मिलता है।

1. दान और सेवा - अन्न, वस्त्र, धन, फल और जरूरतमंदों की मदद करें। दान से ग्रह दोष दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। गरीबों, ब्राह्मणों या मंदिरों में दान विशेष फलदायी है।

2. भगवान शिव और श्रीकृष्ण की पूजा - नियमित रूप से शिव अभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जप और श्रीकृष्ण आराधना करें। 'ॐ नमः शिवाय' और 'हरे कृष्ण हरे राम' मंत्रों का जप मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।

3. सात्विक दिनचर्या अपनाएं - रोजाना स्नान, स्वच्छता, ध्यान, योग और सरल जीवनशैली अपनाएं। ब्रह्म मुहूर्त में जागकर जप और साधना करें। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

फाल्गुन माह आध्यात्मिक शुद्धि और नई शुरुआत का समय है। इन नियमों का पालन करके आप जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। क्रोध और तामसिकता से दूर रहकर दान, भक्ति और संयम अपनाएं। इससे मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और जीवन सुखमय बनेगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur
नवनीत राठौर को मीडिया के अलग-अलग संस्थानों में काम करने का 6 साल से ज्यादा का अनुभव है। इन्हें डिजिटल के साथ ही टीवी मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है। नवनीत फीचर लेखन के तौर पर कई सालों से काम कर रहे हैं और हेल्थ से जुड़ी खबरों को लिखने-पढ़ने का शौक है। और पढ़ें
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