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जानें क्यों मनाई जाती है बैसाखी, पढ़े ये मान्यताएं

भारत त्योहारों का देश है। यहां कई धर्म है और इन सभी धर्मों के अपने-अपने त्योहार है। साल भर कोई न कोई त्योहार आता ही है। वैसे ही बैसाखी का त्योहार अप्रैल के 13 या 14 तारीख को मनाया जाता है। इस समय...

जानें क्यों मनाई जाती है बैसाखी, पढ़े ये मान्यताएं
लाइव हिन्दुस्तान टीमWed, 12 Apr 2017 01:35 PM
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भारत त्योहारों का देश है। यहां कई धर्म है और इन सभी धर्मों के अपने-अपने त्योहार है। साल भर कोई न कोई त्योहार आता ही है। वैसे ही बैसाखी का त्योहार अप्रैल के 13 या 14 तारीख को मनाया जाता है। इस समय खेतों में राबी की फसल लहलहाती है, किसानों के मन में खुशी रहती है। यह त्योहार पूरे पंजाब के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है। केरल में यह त्योहार 'विशु' कहलाता है। बंगाल में इसे नब बर्ष, असम में इसे रोंगाली बिहू, तमिल नाडू में पुथंडू और बिहार में इसे वैषाख के नाम से पुकारा जाता है। 

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इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे कई मान्यताएं है जैसे:

यह दिन किसानों के लिए महत्‍वपूर्ण है क्योंकि यह दिन राबी फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। इसी दिन गेहूं की पक्की फसल को काटने की शुरूआत होती है। इस दिन किसान सुबह उठकर नहा धोकर मंदिरों और गुरुदृारे में जाकर भगवान को इसके लिए शुक्रिया अदा करते है।

कहा जाता है कि इस दिन 13 अप्रैल 1699 को सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।

इसे मौसम के बदलाव का पर्व भी कहा जाता है। इस समय सर्दियों की समाप्ति और गर्मियों का आरंभ होता है। 

वहीं व्यापारियों के लिए भी यह अहम दिन है। इस दिन देवी दुर्गा और भगवान शंकर की पूजा होती है। इस दिन व्यापारी नये कपड़े धारण कर अपने नए कामों का आरम्भ करते हैं।

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